लखनऊ: यूपी में थानेदारों की तैनाती को लेकर आईएएस और आईपीएस अफ़सरों में ठन गई है. अब तक जिलों के एसपी या एसएसपी ही अपनी मर्ज़ी से थानेदार पोस्ट करते रहे हैं. लेकिन प्रमुख गृह सचिव अरविंद कुमार के ताज़ा आदेश से मामला आर-पार का हो गया है.

9 मई को ये आदेश जारी हो गया. वे लिखते हैं," अब बिना डीएम के अनुमोदन के एसपी अपने जिलों में थाना प्रभारी या इंस्पेक्टर तैनात नहीं करेंगे." इस नए आदेश की चिट्ठी सभी आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को भेज दी गई. इसी बात पर हंगामा खड़ा हो गया है.

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आईपीएस अफ़सरों के संगठन ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से इस आदेश को वापस लेने की मांग की है. आईपीएस एसोसिएशन ने कहा कि ये नया नियम हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ है. इससे पुलिस अफ़सरों का मनोबल टूट जाएगा.

इसी बीच नोएडा के एसएसपी अजयपाल शर्मा ने बीते शुक्रवार को 9 थानेदार बदल दिए. अब इलाक़े के डीएम ब्रजेश नारायण सिंह ने एतराज़ जताते हुए एसएसपी के फ़ैसले को रद्द कर दिया. डीएम ने एसएसपी को चिट्ठी में लिखा है," आपके फ़ैसले को निरस्त नहीं करता तो जनता में ग़लत मैसेज जाता और शासन के आदेश की अवहेलना होती."

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गृह विभाग के नए आदेश के बाद बिना डीएम से पूछे बिना थानेदार ना तो हटाए जा सकते हैं ना ही तैनात किये जायेंगे. ये मामला कुछ ऐसा ही है कि किसी खिलाडी को कैप्टन बना दिया गया लेकिन टीम में कौन कौन खेलेगा? ये वो तय नहीं कर सकता है.

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थानेदारों की तैनाती पर यूपी सरकार के नये आदेश को आईएएस अफ़सर सही ठहराते हैं. वे कहते हैं ऐसा तो पुलिस रेगुलेशन एक्ट में है. जिसके नियम 524 में लिखा है,"जिले में पुलिस इंस्पेक्टर रैंक तक के लोगों के ट्रांसफ़र और पोस्टिंग का अधिकार एसपी को है. लेकिन इसके लिए डीएम की सहमति ज़रूरी है."

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जब मायावती 2009 में यूपी की सीएम थीं, तब भी ये आदेश जारी हुआ था. लेकिन नया आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ है. दोनों ही अदालतों ने कहा था पुलिस रेगुलेशन के इस एक्ट की कोई ज़रूरत नहीं बची है. हाई कोर्ट ने 2017 में कहा था पुलिस स्थापना बोर्ड का ये काम है. जिलों के एसपी ही बोर्ड के अध्यक्ष होते हैं. एएसपी रैंक के बाक़ी पुलिस अफ़सर इसके मेंबर होते है. यही बोर्ड थानेदारों की पोस्टिंग करता है.

सीएम योगी आदित्यनाथ यूपी पुलिस की कई बार तारीफ़ कर चुके हैं. सार्वजनिक मंचों से क़ानून व्यवस्था पर पुलिसवालों की पीठ थपथपाते रहे हैं. योगी की हरी झंडी मिलते ही यूपी में ताबड़तोड़ एनकांउटर का सिलसिला जारी है. कुछ मामलों में विवाद भी हुआ लेकिन योगी ने हमेशा पुलिसवालों का साथ दिया.

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ये बात सीनियर आईएएस अधिकारियों को अखरती रही है. इससे पहले भी पिछले साल 7 सितंबर को भी एक आदेश हुआ था. जिसमें हर महीने की 7 तारीख़ को जिलों में क्राइम मीटिंग करने को कहा गया. लेकिन एसपी के बदले ये बैठक डीएम की अध्यक्षता में करने का आदेश दिया गया.

आईपीएस अफ़सरों के भारी विरोध के बाद ये फ़ैसला वापस लेना पड़ा. यूपी में आईएएस अधिकारियों ने अब तक पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू नहीं होने दिया. जब भी एनसीआर, लखनऊ और कानपुर के इलाक़ों में इसे शुरू करने की बात हुई. फ़ाईल किनारे कर दी जाती रही. जबकि ओडिशा जैसे छोटे राज्यों में भी पुलिस कमिश्नर की व्यवस्था है.