गोरखपुर: नेपाल के पहाड़ों पर बारिश का असर भारत के पूर्वी यूपी के तराई क्षेत्रों की नदियों में भी दिखाई देने लगा है. पड़ोसी देश नेपाल के पानी छोड़ने से गोरखपुर और आसपास के जिलों में नदियां उफना गईं हैं. नदियों का जल स्तर भी एक से डेढ़ मीटर तक बढ़ गया है. ऐसे में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है. हालांकि नेपाल से करार के बाद ये तय है कि वो कब और कितना पानी छोड़ेगा, इसकी जानकारी भारत को पहले ही मिल जाएगी. लेकिन, दो दिनों के अंदर 1,21,000 क्यूसेक पानी छोड़ने से पूर्वी यूपी की नदियां उफान पर हैं.
गोरखपुर में बहने वाली राप्ती नदी के जलस्तर में अचानक से वृद्धि देखने को मिली है. नेपाल ने दो दिन में 1,21,000 क्यूसेक पानी छोड़ देने से जलस्तर अचानक से एक से डेढ़ मीटर तक बढ़ गया है. गोरखपुर के दक्षिण में बहने वाली सरयू और पश्चिम में बहने वाली घाघरा नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है. वहीं कुशीनगर में बहने वाली गंडक और छोटी गंडक भी उफान पर हैं. कुशीनगर में नदी के किनारे बसे कई गांवों को एहतियात के तौर पर खाली भी कराया जा रहा है. नेपाल के भैंसालोटन से पानी छोड़ने के कारण हितौनी घाट और कटाई भरपुरवा समेत कई घाटों पर पानी उफान पर है.
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नेपाल के पानी छोड़ने के कारण हर साल पूर्वी यूपी के तराई क्षेत्रों की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है. नदियों के अचानक बढ़े जलस्तर के कारण प्रशासन भी पूरी तरह से बेबस हो जाता है. ऐसे में प्रशासन और एनडीआरएफ के प्रयास भी पूरी तरह से इसे रोकने में नाकाफी साबित होते हैं. गोरखपुर और आसपास के जिलों में पिछली बार नेपाल के पानी छोड़ने और बारिश के कारण नदियां उफान पर आकर तबाही मचाने लगी थीं. सैकड़ों गांव मैरुण्ड हो गए थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर राहत सामग्री भी बंटवाई थी.
शहर के भी कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए थे. शहर के पश्चिम से सटे गांवों में भी तबाही के मंजर साफ देखे जा सकते थे. प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए हर संभव प्रयास किया. लेकिन, कई गांव में जाने वाले संपर्क मार्ग के कट जाने से बाढ़ में फंसे लोगों तक राहत सामग्रियां पहुंचाने के लिए स्टीमर और बोट की व्यवस्था भी की गई थी. कई सामाजिक संगठनों ने आगे आकर रेलवे स्टेशन और बांधों पर शरण लिए लोगों में राहत सामग्री भी वितरित करवाई थी.
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इस बार बाढ़ से बचाव के लिए जिला और पुलिस प्रशासन के साथ एनडीआरएफ और सेना ने 14 जून को राप्ती नदी के किनारे मॉक-ड्रिल किया था. मॉक-ड्रिल के दौरान जिलाधिकारी के. विजयेन्द्र पाण्डियन ने कहा था कि वे पिछली बार आई बाढ़ से सबक लेते हुए पहले से ही तैयारियां कर चुके हैं. जिला प्रशासन, पुलिस और एनडीआरएफ के साथ अन्य विभाग और सेना भी पूरी तरह से तैयार है. नेपाल से पहले बगैर किसी सूचना के पानी छोड़ दिया जाता था. लेकिन, अब करार के बाद नेपाल पानी छोड़ने के पहले हमारी सरकार को इसकी जानकारी दे रहा है. ये भी बताया जाता है कि वो कब और कितना पानी छोड़ेगा. इससे राहत और बचाव कार्य में आसानी होती है.
जिलाधिकारी के. विजयेन्द्र पाण्डियन ने बताया कि आधा मीटर तक राप्ती का पानी बढ़ा है. नेपाल से पानी छोड़ने के कारण वो पानी महराजगंज होते हुए गोरखपुर की नदियों में आ जाता है. वे लोग कल से मॉनीटर किए हुए हैं. महराजगंज के अधिकारियों से भी कहा गया है कि वे जलस्तर बढ़ने पर जानकारी देते रहें. पानी बढ़ने के कारण कैम्पियरगंज, पीपीगंज और सहजनवां में कटान की सूचना मिल रही है. वहां पर टीम भेजी गई है. रेनकट और रैटहोल के मरम्मत का काम चाल रहा है.
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उन्होंने बताया कि अचानक से बारिश होने और नेपाल से पानी छोड़ने की दशा में वे लोग तैयारी में हैं. उन्होंने बताया कि रेस्क्यू के लिए 150 बाढ़ चौकियां तैयार हैं. रेस्क्यू के लिए नाव और बोट की व्यवस्था भी की गई है. जिलाधिकारी ने बताया कि मैरुण्ड होने वाले गांव के आसपास राहत सामग्रियों की व्यवस्था भी कर ली गई है. बंधे को नुकसान होने की दशा में लोकल रिपेयरिंग शुरू करा रहे हैं.
हालांकि प्रशासन ने 21 दिन पहले मॉक-ड्रिल किया था. उस समय हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट और बाढ़ के पानी में रेस्क्यू कर लोगों की जान बचाने का अभ्यास किया गया था. जिलाधिकारी के. विजयेन्द्र पाण्डियन ने दावा भी किया था कि उनकी तैयारी पूरी है. लेकिन, जिस तरह से राप्ती नदी का पानी बढ़ रहा है, ऐसे में ये संभावना भी व्यक्त की जा रही है कि नेपाल ने एक साथ पानी छोड़ दिया, तो राप्ती और आसपास की नदियां तबाही मचा सकती हैं. ऐसे में प्रशासन के लिए राहत और बचाव कार्य में भी काफी मुश्किलें आने से इंकार नहीं किया जा सकता है.
पिछले साल गोरखपुर के कई इलाकों में आई बाढ़ ने जिला प्रशासन की पोल खोल दी थी. तैयारियां पूरी नहीं होने की वजह से पिछले साल की बाढ़ में सैकड़ों गांव और घर डूब गए थे. लोगों को बांध, सड़क और स्टेशन पर आसरा लेना पड़ा था. सैकड़ों लोग बेघर हो गए थे. इसके साथ ही भारी संख्या में जन-धन की भी हानि हुई थी. इस साल भी मानसून अब आने को है और बाढ़ का खतरा बना हुआ है. गोरखपुर को चारों तरफ से बाढ़ से बचाने वाले 70 छोटे- बड़े बाँध हैं. जहां से बाढ़ तबाही मचा सकती है.
राप्ती नदी और बांध के किनारे बसे गांवों में भी एलर्ट जारी किया गया है. लेकिन, मानसून की दस्तक और अचानक नेपाल ने अधिक मात्रा में पानी छोड़ने के खतरे के बीच इस साल फिर तबाही का मंजर देखने को मिल सकता है. ऐसे में जिला प्रशासन के साथ गांववालों को भी पहले से ही बचाव और राहत के इंतजाम करने होंगे.
