नई दिल्ली: बिहार में सियासी पारा चढ़ा हुआ है. 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने जेडीयू का दामन थाम लिया है. उनके पार्टी में शामिल होने से जहां एक तरफ जेडीयू खुद को मजबूत मान रही है तो वहीं विपक्षी पार्टियों कांग्रेस और आरेजडी ने नीतीश कुमार पर निशान साधा है. विपक्ष ने दावा किया है कि इस कदम के बावजूद भी बिहार से एनडीए का सफाया हो जाएगा और उसे हारने से कोई नहीं बचा सकता.

बिहार में विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर तंज करते हुए कहा कि नीतीश कुमार का भरोसा उनकी ही पार्टी और पार्टी कार्यकर्ताओं से उठ चुका है इसलिए उन्होंने 'बाहरी' का सहारा लिया है. द टेलीग्राफ के मुताबिक आरजेडी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि प्रशांत किशोर के जेडीयू में आने से हमारे उपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि 100 प्रशांत किशोर भी बिहार में एनडीए को हारने से नहीं बचा सकते. अगले चुनाव में बिहार में आरजेडी की सरकार बनने से कोई रोक नहीं सकता. आरजेडी नेता ने कहा, ''वे नीतीश कुमार के भाग्य को नहीं बदल सकते और न ही अगले चुनाव में बिहार से एनडीए के सफाए को रोक सकते हैं.''

वहीं कांग्रेस नेता प्रेम चंद मिश्रा ने कहा कि प्रशांत किशोर ने गलत पार्टी का चयन किया है. उन्होंने कहा कि अगर प्रशांत किशोर को राजनीति ही करनी थी तो उन्हें किसी ऐसे पार्टी से जुड़ना चाहिए था जो विचारधारा के साथ राजनीति करने में भरोसा रखती है. जेडीयू के जो नेता यह कह रहे हैं कि पार्टी मजबूत हुई है तो क्या इससे पहले पार्टी मजबूत नहीं थी. कांग्रेस नेता ने कहा कि समझ में नहीं आ रहा है कि जेडीयू के नेता प्रशांत किशोर के ज्वाइन करने से क्यों खुश हो रहे हैं.

खबरों की माने तो नीतीश कुमार प्रशांत किशोर को नंबर दो की पोजीशन देने का मन बना चुके हैं. प्रशांत किशोर पार्टी और सरकार के बीच पुल का काम करेंगे. आने वाले समय में प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की भी खबरें हैं. जेडीयू ज्वाइन करने के फैसले के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यह ऑफर काफी पहले से था पर अब समय आ गया जब मैंने फैसला लिया. नीतीश कुमार जो भी जिम्मेदारी सौंपेंगे उसे निभाउंगा, चाहे वो सरकार में हो या पार्टी में. दोनों के बीच पुल का भी काम करूंगा.