इलाहाबाद: क्लीनिकल इस्टैबलिश्मेंट एक्ट को खत्म किये जाने समेत कई मांगों को लेकर इंडियन मेडिकल काउंसिल की अपील की अपील पर आज संगम नगरी इलाहाबाद के भी प्राइवेट डॉक्टर्स पूरी तरह हड़ताल पर हैं. इस हड़ताल का इलाहबाद के प्राइवेट हॉस्पिटल्स-नर्सिंग होम्स और क्लीनिक्स पर ज़बरदस्त असर देखने को मिल रहा है.

हड़ताल से प्राइवेट अस्पतालों में OPD ठप्प

डॉक्टर्स की इस देशव्यापी हड़ताल से प्राइवेट अस्पतालों में OPD ठप्प है, लिहाज़ा गर्मी के इस मौसम में बीमारियों की चपेट में आए मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इलाज के लिए दूर-दराज से आये हज़ारों मरीजो को आज मायूस होकर खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है.

इन्डियन मेडिकल काउंसिल की अपील पर इलाहाबाद में प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सभी डॉक्टर्स आज पूरी हड़ताल पर हैं और अपने अपने अस्पतालों और क्लीनिक के बाहर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार से क्लीनिकल इस्टैबलिश्मेंट एक्ट को वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं.

कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट में बदलाव किए जाने की भी मांग

प्राइवेट डॉक्टर्स इसके साथ ही एमसीआई की जगह नेशनल मेडिकल काउंसिल बनाए जाने के फैसले को बदलने, एमबीबीएस के बाद नेक्स्ट का इम्तहान कराए जाने को ख़त्म करने, चिकित्सा सुरक्षा अधिनियम को सख्ती से लागू किये जाने और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट में बदलाव किये जाने की भी मांग कर रहे हैं.

इलाहाबाद में डॉक्टर्स की इस हड़ताल का ज़बरदस्त असर देखने को मिल रहा है. हड़ताली डॉक्टर्स का आरोप है कि नये नए नियम बनाए जाने से न सिर्फ प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों पर सरकारी अफसरों का शिकंजा और कस जाएगा बल्कि इससे मेडिकल सुविधाएं और महंगी हो जाएँगी और साथ ही आम लोगों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.

डॉक्टर्स की हड़ताल की वजह से मायूस होकर लौटना पड़ा वापस

डॉक्टर्स की इस हड़ताल का साफ़ असर इलाज के लिए दूर-दराज से आये मरीजों पर साफ़ देखने को मिल रहा है. गर्मी के इस मौसम में तमाम मरीज बीमारियों की चपेट में आकर इलाज के लिए नर्सिंग होम्स और क्लीनिक पहुंचे, लेकिन डॉक्टर्स की हड़ताल की वजह से उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ा.

हड़ताल से मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इलाज न होने से मायूस मरीजों में से कुछ सरकारी अस्पताल पहुंचे तो गली-कूचे के झोला छाप के पास. मरीजों का कहना था कि डॉक्टर्स दूसरे तरीकों से भी अपना विरोध जता सकते थे क्योंकि हड़ताल का साफ़ असर लोगों की ज़िंदगी और सेहत पर पड़ता है.