पटना: जेडीयू के पूर्व उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने बिहार के बाहर फंसे राज्य के हजारों लोगों की मदद करने की अपील नीतीश कुमार से की थी. यहां तक की ट्विटर पर #shameOnNitishKumar नंबर वन पर ट्रेंड भी किया. इसके बाद बिहार सरकार जागी. ऐसे लोगों की मदद के लिए सौ करोड़ रुपये के पैकेज का एलान भी हुआ. अब फंसे लोगों की मदद को लेकर वाह वाही बटोरने की बारी आ गई. प्रशांत किशोर ने सबसे पहले ट्वीट कर नीतीश का शुक्रिया अदा किया.

प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर लिखा, ‘’तमाम सार्वजनिक आक्रोश के बाद, बिहार सरकार ने पूरे भारत में फंसे दैनिक वेतन भोगी और गरीब लोगों की मदद के लिए राहत पैकेज की घोषणा की है. इसमें CM राहत कोष से 100 करोड़ का अतिरिक्त फंड शामिल है. अपनी आवाज़ को उठाने के लिए आप सभी का धन्यवाद. नीतीश कुमार जी को भी धन्यवाद.’’

वहीं बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने भी एक प्रेस रिलीज जारी कर मदद करने का दावा किया. सुशील मोदी ने दूसरे राज्यों में रह रहे बिहारी मजदूरों को लॉकडाउन के दौरान रहने व खाने की समुचित व्यवस्था के लिए बातें की. उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, हरियाण के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल, तेलंगना व महाराष्ट्र के मुख्य सचिवों से इस बाबत बात टेलीफोन से बात की.

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि सभी मुख्यमंत्रियों व मुख्यसचिवों ने आश्वस्त किया कि वे अपने खर्चों पर बिहारी मजदूरों के रहने व खाने की पूरी व्यवस्था करेंगे और उन्हें हर तरह का सहयोग मुहैया कराएंगे. उन सभी ने इसके लिए अपने-अपने राज्यों में एक-एक नोडल अधिकारी को अधिकृत करने का भी आश्वासन दिया जो दिल्ली के स्थानिक आयुक्त बिपीन कुमार से समन्वय स्थापित कर पूरी व्यवस्था की जानकारी देंगे.

वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी मदद करने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री का आभार जताया. लॉकडाउन के चलते पंजाब के मोहाली में फंसे पश्चिम चम्पारण अंतर्गत प्रखंड मैनाटांड और सिकटा के करीब 250 दैनिक मज़दूर जो राशन के अभाव मे दो दिन से सिर्फ पानी पीकर गुजारा कर रहे थे उनकी सूचना पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह तक पहुंचाकर उनकी मदद की.

नेता प्रतिपक्ष के ट्वीट के बाद पंजाब सरकार के अधिकारी वहां पहुंचे और उन मज़दूरों के खाने की व्यवस्था की. अचानक हुए लॉकडाउन और प्रशासन के सख्ती के वजह से गरीब बिहारी मजदूर खाने का सामान और वस्तुएं लाने बाहर नहीं जा सकते थे.