पटना: केंद्र और बिहार में एनडीए की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी एससी/एसटी एक्ट पर अध्यादेश लाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार पर दवाब बना रही है. इस बीच एलजेपी के सांसद चिराग पासवान ने मायावती पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि वे हैरान है कि इस मुद्दे पर बीएसपी सुप्रीमो मायावती चुप क्यों हैं. इसके साथ ही चिराग पासवान ने अपनी पार्टी के पुराने रुख़ को दोहराया कि 9 अगस्त तक सरकार एनजीटी चेयरमैन को हटाएं नहीं तो उनकी पार्टी के कार्यकर्ता दलित संगठनों के साथ सड़कों पर उतरेंगे.

मायावती ने भी इस कानून को कमजोर करने का काम किया: चिराग पासवान

चिराग पासवान ने कहा, ''मैं हैरान हूं कि मायावती चुप क्यों हैं? बात-बात में दलितों की बात करने वाली मायावती दलित उत्पीड़न कानून को कमज़ोर किए जाने के बावजूद चुप क्यों हैं? मायावती ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहते हुए एक आदेश पारित किया था जिसमें वही बातें कही गयी थीं जो सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कही हैं. मायावती ने भी इस कानून को कमज़ोर करने का काम किया था.''

कांग्रेस की नीति स्पष्ट करें राहुल गांधी: चिराग पासवान

वहीं दूसरी तरफ उन्होंने कहा, ''मैं जेडीयू, उपेंद्र कुशवाहा, रामदास आठवले और उन सभी दलों का समर्थन करता हूं जिन्होंने एनजीटी के मुद्दे पर हमारा समर्थन किया है. लेकिन कांग्रेस की नीति स्पष्ट नहीं है. कांग्रेस के नेता और पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने एनजीटी चेयरमैन की नियुक्ति को सही ठहराया है. मेरी मांग है कि राहुल गांधी इन मामलों पर कांग्रेस की नीति स्पष्ट करें.''

पूर्व जस्टिस एके गोयल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के अध्यक्ष पद से हटाया जाए: चिराग पासवान

गौरतलब है कि एससी/एसटी एक्ट पर फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एके गोयल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) का अध्यक्ष बना दिया गया. चिराग पासवान ने कहा कि जस्टिस एके गोयल को एनजीटी का चेयरमैन बनाया गया उससे दलित समुदाय में ये सन्देश गया कि उन्हें पुरस्कृत किया गया है. उन्हें तुरन्त हटाया जाए. सरकार को हमारा समर्थन मुद्दों पर आधारित है और ये मामला इन्हीं मुद्दों पर है.

20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके गोयल और जस्टिस उदय उमेश ललित की पीठ ने एससी/एसटी एक्ट में बड़ा बदलाव करते हुए आदेश दिया था कि किसी आरोपी को दलितों पर अत्याचार के मामले में प्रारंभिक जांच के बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है.