नई दिल्ली: रचनात्मक कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में ‘बदलाव के सारथी’ सेमिनार का आयोजन किया गया. इमें देशभर से करीब पांच सौ से भी अधिक रचनात्मक कार्य करने वाले लोगों के बीच मंथन हुआ. जबकि 15 चुनिंदा लोगों को ‘बदलाव के सारथी’ सम्मान से सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में इस बात को लेकर चर्चा हई कि रचनात्मक कार्यों से समाज में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं.
अतिथियों ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में बदलाव तब होगा जब सरकार से बिना अपेक्षा किए खुद को बदलाव के लिए आगे लाया जाए. जब व्यक्ति के विचारों में बदलाव आएगा तो समाज में भी सकारात्मक बदलाव हो सकते हैं. कार्यक्रम में महात्मा गांधी के आदर्शों और मूल्यों को समझने पर भी बल दिया गया. गांधी भी रचनात्मक कार्यों से परिवर्तन की बात करते थे. आज इसी के बल पर देश के हर क्षेत्र में गुमनाम तरीके से लोग बड़े बड़े बदलाव कर रहे हैं.
कार्यक्रम के संयोजक जय प्रकाश मिश्र ने कहा कि हम खुद समाज में बदलाव लाने के लिए देशभर से पुरानी किताबों को एकत्र कर सुदूर गांवों में लाइब्रेरी की स्थापना कर रहे हैं ताकि इसके बल पर गांव को समृद्ध किया सके. लेकिन, किसी बड़े बदलाव के लिए यह जरुरी है कि हर क्षेत्र में काम करने वाले लोग एक जगह मिले और एक दूसरे का हाथ थामते हुए बदलाव के सारथी बनें. कार्यक्रम का आयोजन जिंदगी फाउंडेशन और अम्बा की ओर से किया गया.
कार्यक्रम में मॉरीशस के राजदूत जगदीश्वर गोवरधन, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके तिवारी, हिंदी के आलोचक डॉ. ज्योतिष जोशी, वरिष्ठ पत्रकार ओंकारेश्वर पांडेय, साहित्यकार ब्रजेंद्र त्रिपाठी, बॉलीवुड के अभिनेता और गैंग्स ऑफ वासेपुर फेम सत्यकाम आनंद, हास्य कवि शंभू शिखर, मिस इंडिया हंगरी अनिशा जोगन्ह, इग्नू के निदेशक डॉ. केडी प्रसाद सहित तमाम गणमान्य व्यक्तियों ने बदलाव के सारथी विषय पर अपने अपने विचार व्यक्त किए. कार्यक्रम का संयोजन पुरानी की किताबों से गांवों में लाइब्रेरी बनाने वाले जय प्रकाश मिश्र ने की.