इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रिंगरोड के लिए शिवपुर परगना के बाइस गांवों की जमीन अधिग्रहीत करने की वैधता के खिलाफ दाखिल की गई जनहित याचिका को सुनवाई के बाद ख़ारिज कर दिया है. अदालत से अर्जी खारिज होने के बाद वाराणसी में रिंगरोड निर्माण का रास्ता साफ़ हो गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि अब जल्द ही इस पर काम भी शुरू हो जाएगा.

ज़मीन की पैमाइश कराकर मुआवजे का निर्धारण

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने रिंग रोड के लिए हुए ज़मीन अधिग्रहण के खिलाफ दाखिल की गई अर्जी को खारिज करते हुए कहा है कि जिन किसानों ने जमीन का मुआवजा नहीं लिया है वे जिलाधिकारी के समक्ष अर्जी दाखिल करे ताकि डीएम ज़मीन की पैमाइश कराकर मुआवजे का निर्धारण करे.

2013 के कानून के मुताबिक दिया जाए मुआवजा

अदालत ने यह ज़रूर कहा है कि मुआवजा 2013 के कानून के मुताबिक दिया जाए. यदि जिलाधिकारी के आदेश से कोई संतुष्ट न हो तो वह नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है. कोर्ट ने अधिग्रहण रद्द करने से इंकार कर दिया है. यह आदेश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खण्डपीठ ने होरी लाल व दर्जनों अन्य की याचिकाओं पर दिया है.

जिलाधिकारी के समक्ष अर्जी देने का अधिकार

याची का कहना था कि जनवरी 14 के मार्केट रेट से मुआवजे का भुगतान किया जाए. कोर्ट ने इस तर्क को मानने से इंकार कर दिया और कहा कि 2013 के कानून की धारा 64 के तहत मुआवजा न लेने वालों को जिलाधिकारी के समक्ष अर्जी देने का अधिकार है. जिस पर वह निर्णय लेंगे.