मेरठ: दलित आंदोलन के नाम पर भड़की हिंसा में उत्तर प्रदेश को हिला कर रख दिया है लेकिन आंदोलन के नाम पर हिंसा की स्क्रिप्ट सियासी गलियारों में लिखी गई थी. इस बात का खुलासा पुलिसिया जांच में अब हो रहा है. दंगे के बाद पुलिस की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है. वैसे-वैसे कई ऐसे चेहरे बेनकाब हो रहे हैं जो पिछली सरकारों में रसूख रखते थे लेकिन अब इन सफेदपोशों के चेहरे पर दंगे की कालिख पूत गई है. दलित वोट बैंक को फिर से पार्टी के पक्ष में करने के चक्कर में इन लोगों ने माहौल खराब करने की साजिश रच डाली. फिलहाल पुलिस अब ऐसे लोगों पर शिकंजा कस रही है.

2 अप्रैल को कानून में बदलाव को लेकर दलितों ने भारत बंद का ऐलान किया था. जिसमें एक सुनियोजित साजिश के तहत हिंसा भड़काने का काम किया गया. मेरठ जोन में पुलिस जांच में अब तक 500 से ज्यादा लोग सामने आ चुके हैं जिन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया है. इसी के साथ साजिश करने वालों पर लगातार मुकदमा भी दर्ज किए जा रहे हैं. लेकिन खास बात यह है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश ही इस साजिश का केंद्र रहा.

एडीजी प्रशांत कुमार की मानें तो 2 अप्रैल को हुई हिंसा निश्चित रूप से साजिश थी जिसकी कमान बसपा के नेताओं ने संभाली. मेरठ में दंगे को भड़काने वाले योगेश वर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. यही नहीं योगेश का वो भड़काऊ बयान भी सामने आया जिसमें वो आंदिलंकारियों को भड़का रहे हैं. इसी के चलते पुलिस ने योगेश को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा है.

वहीं मुजफ्फरनगर में बसपा के जिला अध्यक्ष को भी दंगे की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है. कमोबेश यही स्थिति हापुड़ में रही. जहां बसपा के पूर्व विधायक के बेटे को पुलिस ने इन्हीं संगीन आरोप में गिरफ्तार कर लिया. केवल दलित राजनीति को लेकर दंगे की साजिश रची गई. लोगों को गलत बातें बता कर भड़काया गया और उन्हें हिंसा के लिए इस्तेमाल किया गया.

पुलिस भी मान रही है कि दंगा केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए और एक पार्टी विशेष का वोट बैंक संगठित करने के लिए किया गया. लेकिन इस हिंसा की साजिश पार्टी के शीर्ष नेताओं रची गयी या नहीं इस बात पर कहने से पुलिस के अधिकारी बचते नजर आ रहे हैं. वहीं पुलिस मानती है कि बसपा के जिला स्तर के नेताओं ने इस दंगे को भड़काने का काम किया है जिन पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है.