ईरान और अमेरिका के बीच हुई डील को लेकर जी7 देशों ने ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया है. इसपर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि वह ग्रुप देशों के ज्वाइंट स्टेटमेंट का समर्थन करते हैं.

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ज्वाइंट स्टेटमेंट में कहा गया है कि हम इस डील का स्वागत करते हैं. साथ ही ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर कंट्रोल करने के लिए एक और एग्रीमेंट जरूरी है. यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसपर ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते में कहीं चर्चा नहीं की गई है.

द गार्जियन के मुताबिक, बयान में कहा गया है कि ईरान के साथ भविष्य में बातचीत यूएन न्यूक्लियर वेपन एजेंसी, IAEA सहित रीजनल और इंटरनेशनल एक्टर्स के बड़े ग्रुप के शामिल होने से ही हो सकेगी. हालांकि, जानकार मानते हैं, कि यह ऐसी डील जो अपने मकसद में शायद ही सफल हो पाई है. 

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ईरान सिर्फ अमेरिका से बातचीत में है, ईयू को नहीं दे रहा भावइधर, ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों और प्रॉक्सी सेनाओं के लिए समर्थन के बारे में ईयू के देशों के साथ बाचतीत के प्रस्ताव को मना करने के लिए मजबूर है. तेहरान सिर्फ अमेरिका से ही बातचीत कर रहा है. यूरोप को काफी हद तक बेमतलब मानता है. ईरान फ्रांस और ब्रिटेन की तरफ से तैयार टास्कफोर्स पॉलिसी को खारिज कर सकता है. यह टास्कफोर्स हॉर्मुज के लिए बनाई गई है.

इसके अलावा यूक्रेन युद्ध को लेकर भी जी7 के देशों ने रूस पर प्रेशर बनाने की बात कही है. जी7 की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा था कि जी7 देशों की बैठक में दुनिया की सबसे पॉवरफुल इकोनॉमी साथ आ रही हैं. इन देशों में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूके, कनाडा और जापान शामिल है. सभी देशों ने कहा है कि हम मानते हैं कि यह अन्य विकल्पों के साथ आगे बढ़ने का सही समय है. राष्ट्रपति ट्रंप ने एक डील की है. इसका मकसद हॉर्मुज को फिर से खोलना है, जिसका हम समर्थन करते हैं. 

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