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श्रमिक स्पेशल ट्रेन में मजदूरों से टिकट वसूली नहीं हुई बंद, बच्चों का भी लगा पूरा टिकट
एबीपी न्यूज़ | 08 May 2020 01:55 PM (IST)
रेलवे और सरकार के दावों के बावजूद श्रमिक एक्सप्रेस में बंद नहीं हुई मजदूरों से किराया वसूली. गुजरात से यूपी के कासगंज लौटे हर एक शख्स से लिए गए 500 रुपये. .

कासगंज: केंद्र सरकार और रेलवे मजदूरों से रेल भाड़ा नहीं लिए जाने की बात लगातार कह रही है. लेकिन फिर भी मजदूरों का कहना है कि उन्हें टिकट खरीदना पड़ रहा है. यूपी के कासगंज पहुंचे मजदूरों से जब पूछा गया कि रेलवे की ओर से मिला टिकट उन्हें राज्य सरकार ने फ्री में दिया या फिर उन्होंने इसका कोई भुगतान किया है. तो मजदूरों ने बताया कि टिकट के रुपये विरम ग्राम नगर पालिका ने जमा किया है उसके बाद ही टिकट दिया गया. विरम ग्राम से कासगंज जंक्शन तक रेलवे ने 500 रुपये का टिकट चार्ज किया है. गुजरात के विरम ग्राम से मजदूरों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन शुक्रवार सुबह कासगंज जंक्शन पहुंची. विरम ग्राम में मजदूरों की मेडिकल जांच होने के बाद उन्हें वहां से रवाना किया गया था. कासगंज जंक्शन पहुंचने के बाद जिला प्रशासन ने सभी मजदूरों की थर्मल स्क्रीनिंग की और उसके बाद उन्हें खाना दिया गया. फिर मजदूरों को बस से उनके गृह जनपद मुख्यालय और तहसील मुख्यालय तक पहुंचाया जा रहा है. इन मजदूरों और कामगारों में महिलाएं बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं जो अब अपने घरों को वापस जा रहे हैं. इन मजदूरों में कासगंज के अलावा अमेठी जौनपुर फर्रुखाबाद बहराइच आगरा बरेली बदायूं शाहजहांपुर समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों के मजदूर और कामगार शामिल हैं. बच्चों का भी लगा पूरा टिकट यही नहीं एक मजदूर ने यह भी आरोप लगाया है उसके दो बच्चों का भी पैसा विरम ग्राम नगरपलिका के लोगों ने वसूला है. उसके बाद ही उसे ट्रेन का टिकट दिया गया है. मजदूर के मुताबिक उसके बच्चों की उम्र 2 साल से 4 साल के बीच में है. कासगंज पहुंचे मजदूरों की व्यवस्था जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. मजदूरों के पहुंचने के बाद जनपद वार बसों में बैठाने से पहले मजदूरों की थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था थी लेकिन थर्मल स्क्रीनिंग में ही काफी वक्त लगा. इसके बाद मजदूरों को खाने के पैकेट मुहैया कराए गए और अनाउंसमेंट के जरिए उन्हें जनपद मुख्यालय की बसों में बैठने के लिए निर्देशित किया गया लेकिन इस दौरान कासगंज जिला प्रशासन सोशल डिस्टेंस इन जैसे मानक पूरे करने में पूरी तरह से नाकामयाब साबित हुआ. जब इस मामले में कासगंज जिला प्रशासन के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो डीएम चंद्रप्रकाश सिंह पत्रकारों से बात करने से इंकार कर दिया. ये भी पढ़ें-श्रमिक स्पेशल ट्रेन से कौन जा सकता है घर, कैसे कराएं रजिस्ट्रेशन? पूरा तरीका समझिएमहाराष्ट्र: औरंगाबाद में ट्रेन से कटकर 16 मजदूरों की मौत, मृतकों के परिजनों को 5 लाख के मुआवजे का एलान