Kerala News: केरल में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के बाद ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. समारोह में राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण गाए जाने पर अलग-अलग राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. अब यह मामला राज्य की राजनीति में चर्चा का अहम विषय बन गया है.
मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने बुधवार को साफ कहा कि उन्हें और उनके साथ मौजूद नेताओं को पहले से इस बात की जानकारी नहीं थी कि कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा पाठ किया जाएगा. उन्होंने बताया कि यह फैसला कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े अधिकारियों की ओर से लिया गया था. मुख्यमंत्री ने कहा, “जब राष्ट्रगीत शुरू हुआ और पूरा गाया जाने लगा, तभी हमें इसकी जानकारी मिली. उस समय कार्यक्रम को बीच में रोकना संभव नहीं था.”
इस घटना के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने सवाल उठाए. पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में आमतौर पर ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो छंद ही गाए जाते हैं. माकपा ने पूरे गीत के इस्तेमाल को गलत फैसला बताते हुए कहा कि ऐसे मुद्दों पर संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि केरल एक बहुलतावादी समाज वाला राज्य है.
शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद माकपा नेता पी ए मोहम्मद रियास ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि आधिकारिक कार्यक्रमों में लंबे समय से केवल शुरुआती दो छंद गाने की परंपरा रही है और उसी का पालन किया जाना चाहिए था.
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने माकपा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगीत को लेकर विवाद पैदा करना गलत है. पार्टी का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ देश की भावनाओं से जुड़ा हुआ है और इसका विरोध करना उचित नहीं माना जा सकता. भाजपा विधायक वी मुरलीधरन ने भी माकपा नेताओं से पूछा कि आखिर राष्ट्रगीत के किस हिस्से पर उन्हें आपत्ति है.
अब यह मामला केवल शपथ ग्रहण समारोह तक सीमित नहीं रह गया है. यह राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है. एक तरफ सरकार इसे प्रशासनिक फैसला बता रही है. दूसरी तरफ विपक्ष और अन्य दल इस मुद्दे पर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं.
