केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की परियोजनाओं में सड़क, पुल और सुरंगों से जुड़े ढहने या गंभीर क्षति के 55 मामले सामने आए हैं. इन घटनाओं ने देश में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है.

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उपलब्ध राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, केरल में सबसे अधिक नौ, महाराष्ट्र में आठ और बिहार में छह परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुईं. उत्तर प्रदेश में पांच, हरियाणा में चार, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में तीन-तीन मामले दर्ज किए गए. गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और ओडिशा में दो-दो परियोजनाएं प्रभावित हुईं, जबकि आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, तेलंगाना और उत्तराखंड में एक-एक मामला सामने आया.

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मध्य प्रदेश से कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह के सवाल के जवाब में गडकरी ने बताया कि 55 मामलों में से 40 घटनाएं निर्माण के दौरान हुईं, जबकि शेष परियोजनाओं के पूरा होने के बाद सामने आईं. उन्होंने यह भी कहा कि लगभग सभी मामलों में संबंधित निजी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, लेकिन सरकारी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई केवल दो मामलों में हुई.

सबसे अधिक जुर्माना किस पर लगा?

लापरवाही के मामलों में सबसे बड़ा आर्थिक दंड तेलंगाना के एक ठेकेदार पर लगाया गया, जिस पर वर्ष 2022 में 134.78 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया. इसके अलावा मध्य प्रदेश के एक ठेकेदार पर 119 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र में 41.32 करोड़ रुपये, केरल में 31.24 करोड़ रुपये और बिहार के एक ठेकेदार पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया.

पिछले कुछ वर्षों के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर हादसे

पिछले कुछ वर्षों में सड़क, पुल और सुरंगों से जुड़े कई बड़े हादसे हुए हैं. हालांकि इनमें से सभी घटनाएं NHAI परियोजनाओं से संबंधित नहीं थीं, लेकिन इनसे निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे.

1. मोरबी पुल हादसा (गुजरात, 2022)

30 अक्टूबर 2022 को गुजरात के मोरबी में मच्छू नदी पर बना सस्पेंशन ब्रिज अचानक टूट गया. इस भीषण हादसे में 141 लोगों की मौत हुई. पुल मरम्मत के कुछ ही दिनों बाद आम लोगों के लिए खोला गया था.

2. सिलक्यारा सुरंग हादसा (उत्तराखंड, 2023)

नवंबर 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग का एक हिस्सा ढह गया, जिससे 41 मजदूर भीतर फंस गए. करीब 17 दिन चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया. यह परियोजना NHAI की नहीं, बल्कि NHIDCL की थी.

3. बिहार में पुल ढहने की घटनाएं

बिहार में हाल के वर्षों में निर्माणाधीन और पुराने पुलों के गिरने की कई घटनाएं सामने आईं. 2026 में भागलपुर का विक्रमशिला सेतु आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ, जिसके बाद उसके रखरखाव और समय पर मरम्मत को लेकर गंभीर सवाल उठे.

4. विवेकानंद फ्लाईओवर हादसा (कोलकाता, 2016)

मार्च 2016 में निर्माणाधीन विवेकानंद फ्लाईओवर का एक हिस्सा गिर गया था. इस दुर्घटना में 26 लोगों की मौत हुई और 100 से अधिक लोग घायल हुए.

5. मुंबई CSMT फुटओवर ब्रिज हादसा (2019)

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के पास फुटओवर ब्रिज का एक हिस्सा गिरने से 6 लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए.

आखिर क्यों खराब हो जाती हैं सड़कें और क्यों ढह जाते हैं पुल?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे केवल एक कारण नहीं होता. निर्माण प्रक्रिया से लेकर रखरखाव तक कई स्तरों पर हुई चूक बड़े हादसों की वजह बन सकती है.

1. निर्माण की खराब गुणवत्ता

सड़क, पुल या सुरंग बनाते समय तय तकनीकी मानकों का पालन करना बेहद जरूरी होता है. यदि निर्माण में जल्दबाजी की जाए या गुणवत्ता से समझौता किया जाए, तो संरचना समय से पहले कमजोर पड़ सकती है. इससे दरारें, धंसाव और ढहने जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है.

2. डिजाइन में खामियां

कई बार समस्या निर्माण में नहीं, बल्कि डिजाइन में होती है. यदि किसी परियोजना की योजना बनाते समय स्थानीय भूगोल, यातायात का दबाव, बारिश, बाढ़ या भूकंप जैसे कारकों का सही आकलन नहीं किया जाता, तो संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.

3. निगरानी की कमी

बड़ी परियोजनाओं की निगरानी इंजीनियरों, सलाहकारों और गुणवत्ता जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है. यदि समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया जाए या छोटी खामियों को नजरअंदाज कर दिया जाए, तो वही आगे चलकर बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं.

4. घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल

यदि निर्माण में निम्न गुणवत्ता का सीमेंट, स्टील, बिटुमेन या अन्य सामग्री इस्तेमाल की जाए, तो सड़क या पुल की मजबूती प्रभावित होती है. भ्रष्टाचार या लागत कम करने की कोशिश भी कई बार निर्माण की गुणवत्ता पर असर डालती है.

5. भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन

भारत के कई हिस्सों में मानसून के दौरान भारी बारिश, बाढ़ और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन सामान्य बात है. यदि जल निकासी की व्यवस्था कमजोर हो या ढलानों की सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान न दिया गया हो, तो प्राकृतिक आपदाएं भी इंफ्रास्ट्रक्चर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं.

6. ठेकेदारों की लापरवाही

कुछ मामलों में समय सीमा पूरी करने, लागत कम रखने या अनुबंध की शर्तों का पूरी तरह पालन न करने की वजह से निर्माण प्रभावित होता है. यदि ठेकेदार तकनीकी मानकों की अनदेखी करते हैं, तो परियोजना की सुरक्षा और उसकी आयु दोनों पर असर पड़ता है.