Explained: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश! कैसा दिखेगा नई लोकसभा सीटों का बंटवारा? समझें गणित
Women’s Reservation Bill: आज लोकसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पेश होने वाला है, यानी सदन में महिलाओं 33% आरक्षण मिलेगा. इसके बाद देशभर में लोकसभा सीटों के आंकड़े बदल जाएंगे.

आज यानी 16 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार लोकसभा में तीन बड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश कर रही है- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक. इनका मकसद है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू कर दिया जाए. इसके लिए लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35. इसमें से करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. यह बदलाव राज्यसभा और सभी विधानसभाओं पर भी लागू होगा. हालांकि, महिला आरक्षण 2023 में ही पास हो चुका था. सरकार का कहना है कि बिना किसी मौजूदा सांसद की सीट घटाए यह आरक्षण दिया जा सके, इसलिए कुल सीटें बढ़ाई जा रही हैं. एक्सप्लेनर में समझते हैं क्या है सीटों का पूरा गणित?
सवाल 1: महिला आरक्षण तो 2023 में ही पास हो चुका था, फिर अब सीटें बढ़ाने और परिसीमन की जरूरत क्यों पड़ी?
जवाब: सितंबर 2023 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास किया था, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है, लेकिन यह आरक्षण तभी लागू हो सकता है जब परिसीमन हो जाए. यानी जनसंख्या के आधार पर चुनाव क्षेत्रों की नई सीमाएं तय हों. 1971 की जनगणना के आधार पर सीटें फ्रीज थीं, जो 2026 तक वैध थीं. अब सरकार 2011 की जनगणना को आधार बनाकर जल्दी परिसीमन पूरा करना चाहती है ताकि 2029 के चुनाव से आरक्षण शुरू हो सके. अगर नई जनगणना (2026-27) का इंतजार किया जाता तो देरी हो जाती.
सवाल 2: परिसीमन क्या है और यह कैसे होगा?
जवाब: परिसीमन का मतलब है कि हर लोकसभा और विधानसभा सीट की जनसंख्या लगभग बराबर हो. अभी 2011 जनगणना के हिसाब से औसतन एक लोकसभा सीट पर करीब 22-23 लाख लोग हैं. नया परिसीमन आयोग बनेगा, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज अध्यक्ष होंगे. आयोग 2011 की जनगणना के आधार पर सभी सीटों की नई सीमाएं तय करेगा. इसका फैसला अंतिम होगा और कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी. सरकार का प्लान है कि सभी राज्यों की मौजूदा अनुपात को बनाए रखते हुए हर राज्य को करीब 50 प्रतिशत अतिरिक्त सीटें दी जाएं, ताकि कोई राज्य नुकसान में न आए.
सवाल 3: नई सीटों का बंटवारा कैसा दिख सकता है?
जवाब: 2011 की जनगणना के आधार पर दो सिनेरियो मिलते हैं, जिसमें कुल सीटें 850 करने पर प्रत्येक राज्य को समान जनसंख्या वाली सीटें मिलें. पहले सिनेरियो में सभी प्रदेशों में 50% तक सीटें बढ़ जाएं या फिर दूसरे सिनेरियो में जनसंख्या के आधार पर बढ़ोतरी हो. उदाहरण के लिए:
- उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120-140 हो जाएंगी.
- बिहार में 40 से बढ़कर 60-73 सीटें.
- मध्य प्रदेश में 29 से बढ़कर 44-51 सीटें.
- राजस्थान में 25 से बढ़कर 38-48 सीटें.
- गुजरात में 26 से बढ़कर 39-42 सीटें.
- महाराष्ट्र में 48 से बढ़कर 72-79 सीटें.
- तमिलनाडु में 39 से बढ़कर 58-60 सीटें.
- केरल में 20 से बढ़कर 30 सीटें.
- पश्चिम बंगाल में 42 से बढ़कर 63-64 सीटें.
इसके अलावा देश भर के सभी प्रदेशों में बढ़ोतरी होगी. अगर शुद्ध जनसंख्या के आधार पर बंटवारा हुआ तो उत्तर भारत को ज्यादा फायदा होगा, लेकिन सरकार का आधिकारिक स्टैंड है कि मौजूदा अनुपात बनाए रखकर 50 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी, जिससे दक्षिण को भी नुकसान नहीं होगा.
सवाल 4: दक्षिणी राज्य विरोध क्यों कर रहे हैं?
जवाब: दक्षिणी राज्य (तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र) चिंतित हैं क्योंकि वे पिछले 50 साल से परिवार नियोजन में सफल रहे. उनकी जनसंख्या वृद्धि कम हुई है. अगर शुद्ध जनसंख्या आधार पर सीटें बंटेंगी तो उनका संसद में हिस्सा घट सकता है. वर्तमान 24.3 प्रतिशत से घटकर करीब 20.7 प्रतिशत रह जाएगा. तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा कि दक्षिण को सीटें बढ़ाना मंजूर नहीं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेतावनी दी कि अगर दक्षिण का प्रतिनिधित्व कम हुआ तो बड़ा आंदोलन होगा. उनका तर्क है कि यह संघीय ढांचे को कमजोर करेगा और जवाब को ज्यादा ताकत देगा.
सवाल 5: इस बदलाव पर सरकार और विपक्ष ने क्या कहा है?
जवाब: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'मुख्य मुद्दा लोकसभा और विधानसभाओं में भारत की महिलाओं को 33% आरक्षण देना है. सामान्य सीट से भी महिलाएं चुनकर आ सकती हैं, लेकिन 33% आरक्षण देने के बाद भारत के लिए यह ऐतिहासिक हो जाएगा. भारत दुनिया में मिसाल कायम करेगा कि हम महिलाओं के लिए कितना बड़ा कदम उठा रहे हैं. इस पर विरोध होने की आवश्यकता नहीं है. परिसीमन या अन्य विषयों को उठाकर महिला आरक्षण को गिराने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए. परिसीमन को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है. इससे किसी को नुकसान नहीं है, जो संसद में साफ भी हो जाएगा.'
विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन करता है लेकिन परिसीमन और सीट बढ़ोतरी को अलग मुद्दा मानकर विरोध कर रहा है. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार महिलाओं के नाम पर भ्रम फैला रही है और उत्तर प्रदेश को फायदा पहुंचाना चाहती है. कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम आदि ने इसे भ्रामक बताया. विपक्ष की बैठक में तय हुआ कि परिसीमन विधेयक का विरोध करेंगे. बिल को पास होने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए. लोकसभा में NDA के पास 292 सांसद हैं, जबकि जरूरत 360 से ज्यादा की है, इसलिए विपक्ष का समर्थन जरूरी है.
विधेयक पास होने के बाद परिसीमन आयोग जल्द बनेगा. नई सीटें और आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होंगे. आरक्षण 15 साल (2029, 2034, 2039) के लिए होगा, उसके बाद संसद फैसला करेगी. SC/ST महिलाओं के लिए भी सब-कोटा रहेगा और सीटें रोटेशन से बदलेंगी. राज्य विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ेंगी और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होगा.
Source: IOCL


























