Women’s Reservation Bill: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीनों बिल पेश, क्या हैं ये, इससे देश में क्या बदल जाएगा, जानें
Women’s Reservation Bill in India: लोकसभा में कुल सीटों की अधिकतम संख्या 850 करने का प्रस्ताव है. प्रस्ताव के अनुसार राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें निर्धारित की जा सकती हैं.

Nari Shakti Vandan Adhiniyam: केंद्र सरकार ने गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) को महिला आरक्षण से जुड़े तीन अहम संशोधन विधेयक पेश किए. इनका मकसद 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून- नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरी तरह लागू करना है. इन प्रस्तावों के तहत 2029 से लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी.
तीनों बिलों का मकसद 2029 तक महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को लागू करना और लोकसभा की सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना है. सरकार ने जो तीन बिल पेश किए हैं, उनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन आयोग के गठन के लिए परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 शामिल हैं.
क्या हैं ये तीनों विधेयक?
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
यह सबसे अहम बिल है क्योंकि इसके तहत कुछ अनुच्छेद में बदलाव करके जनसंख्या की नई परिभाषा और आंकड़ों को स्पष्ट करने के साथ महिला आरक्षण लागू करना शामिल है. सबसे अहम ये है कि बढ़ती आबादी के मद्देनजर संसद में सदस्यों की संख्या को बढ़ाना है. इसके तहत संविधान के अनुच्छेद 81 में बदलाव किया जाना है. लोकसभा में कुल सीटों की अधिकतम संख्या 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है, जबकि राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें निर्धारित की जा सकती हैं. सीटों के निर्धारण के लिए परिसीमन की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी.
यह भी पढ़ें:- विपक्ष के बिना क्या पास हो पाएगा महिला आरक्षण बिल, NDA के पास कितनी ताकत? जानें पूरा नंबर गेम
केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026
दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तय करना है और सीटों के पुननिर्धारण को लागू करना है.
यह भी पढ़ें:- लोकसभा में महिला आरक्षण समेत तीनों बिल पेश होते ही कांग्रेस फायर, पहली प्रतिक्रिया में बोली- 'लोकतंत्र हाईजैक'
परिसीमन विधेयक 2026
सरकार ने कहा है कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में बदलाव नहीं हुआ है इसलिए परिसीमन समय की मांग है. राज्यों के लिए सीटों की संख्या भी तय नहीं है. सरकार का कहना है कि परिसीमन प्रक्रिया आखिरी बार हुई जनगणना 2011 के आधार पर पूरी की जाएगी. इसके लिए हर राज्य में परिसीमन आयोग बनेगा, जो राज्य के सभी दलों से चर्चा के बाद सीटों का अंतिम निर्धारण करेगा.
Source: IOCL

























