Women’s Reservation: लोकसभा में किस क्षेत्र का कितना कब्जा? उत्तर भारत के 38% से दक्षिण को दिक्कत क्यों? समझें पूरी लड़ाई
Women’s Reservation Bill in India: आज सदन में महिला आरक्षण बिल पेश हो गया है. सदन में अभी 543 सीटें हैं, जो बढ़कर 850 हो जाएंगी, लेकिन सदन में किस क्षेत्र का सीट शेयरिंग कितना है? आइए नजर डालते हैं.

आज लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश हो गया है. इसी के साथ लोकसभा में 543 सीटों को बढ़ाकर 850 कर दिया जाएगा. दरअसल, लोकसभा सीटों का शेयर तय करता है कि आपकी आवाज संसद में कितनी मजबूत होगी. ज्यादा सीटें यानी ज्यादा सांसद और ज्यादा विकास योजनाएं. सदन में उत्तर भारत को पहले से ज्यादा शेयर है, नया परिसीमन इसे और बढ़ा सकता है. दक्षिण कह रहा है कि यह संघीय ढांचे को कमजोर करेगा. यह बदलाव भारत की राजनीति का भूगोल ही बदल सकता है, लेकिन मौजूदा वक्त में लोकसभा में किस क्षेत्र का सीट शेयरिंग कितना है और इसका प्रभाव कितना है, जानते हैं एक्सप्लेनर में...
सवाल 1: लोकसभा में किस क्षेत्र का कितना सीट शेयर है?
जवाब: अभी (अप्रैल 2026 तक) लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं. 2008 के परिसीमन के आधार पर इनका क्षेत्रवार बंटवारा इस प्रकार है:
- उत्तर भारत: 206 सीटें (करीब 38%)
- पश्चिम भारत: 76 सीटें (करीब 14.36%)
- दक्षिण भारत: 129 सीटें (करीब 24.03%)
- पूर्वी भारत: 88 सीटें (करीब 16.21%)
- पूर्वोत्तर: 25 सीटें (करीब 4.60%)
- केंद्र शासित प्रदेश (UT): 19 सीटें (करीब 2.76%)
सवाल 2: इन क्षेत्रों में कौन-कौन से राज्य और UT शामिल हैं?
जवाब: 2008 के अंतिम परिसीमन और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:
- उत्तर भारत (206 सीटें): उत्तर प्रदेश (80), बिहार (40), मध्य प्रदेश (29), राजस्थान (25), हरियाणा (10), पंजाब (13), हिमाचल प्रदेश (4) और उत्तराखंड (5).
- पश्चिम भारत (76 सीटें): महाराष्ट्र (48), गुजरात (26) और गोवा (2).
- दक्षिण भारत (129 सीटें): तमिलनाडु (39), कर्नाटक (28), आंध्र प्रदेश (25), तेलंगाना (17), केरल (20).
- पूर्वी भारत (88 सीटें): पश्चिम बंगाल (42), ओडिशा (21), झारखंड (14) और छत्तीसगढ़ (11).
- पूर्वोत्तर (25 सीटें): असम (14), अरुणाचल प्रदेश (2), मणिपुर (2), मेघालय (2), त्रिपुरा (2), मिजोरम (1), नागालैंड (1) और सिक्किम (1).
- केंद्र शासित प्रदेश (19 सीटें): दिल्ली (7), जम्मू-कश्मीर (5), लद्दाख (1), अंडमान-निकोबार (1), पुदुचेरी (1) लक्षद्वीप (1), दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव (2) और चंडीगढ़ (1).
नोट- केंद्र शासित प्रदेशों की कैटेगरी को अलग से रखा गया है.
सवाल 3: यह बंटवारा क्यों है और क्या यह जनसंख्या के हिसाब से दुरुस्त है?
जवाब: नहीं, पूरी तरह दुरुस्त नहीं है. सीटें 2001 जनगणना के आधार पर तय हुई थीं और 1971 जनगणना के फ्रीज को 2001 तक बढ़ाया गया था. उसके बाद 2026 तक फ्रीज रखा गया. उत्तर भारत (खासकर हिंदी बेल्ट) की जनसंख्या तेजी से बढ़ी, लेकिन सीटें नहीं बढ़ीं. दक्षिण के राज्य परिवार नियोजन में सफल रहे, उनकी जनसंख्या वृद्धि कम हुई, फिर भी उनकी सीटें उसी अनुपात में बनी रहीं. नतीजतन, उत्तर को 38% के करीब शेयर मिला, जबकि दक्षिण को 24%. पूर्वोत्तर और छोटे UT कम जनसंख्या के कारण कम सीटें पाते हैं. यही वजह है कि अब 2011 जनगणना (या नई जनगणना) के आधार पर नया परिसीमन करने की बात चल रही है.
सवाल 4: तो यह सीट शेयर कैसे बदलने वाला है? प्रस्तावित 850 सीटों में क्या होगा?
जवाब: हां, अगर 16 अप्रैल 2026 के विशेष संसद सत्र में बिल पास हो गए तो 2029 के चुनाव से सीटें 543 से बढ़कर 850 हो जाएंगी. सरकार का प्लान है कि हर राज्य को मौजूदा सीटों पर 50% बढ़ोतरी मिले, ताकि अनुपात बराबर रहे. फिर भी कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि शुद्ध जनसंख्या आधार पर उत्तर को और फायदा हो सकता है, जबकि दक्षिण, पूर्वोत्तर और पश्चिम का प्रतिशत थोड़ा घट सकता है. उदाहरण से समझें तो अगर अनुपात बदला दक्षिण का शेयर 24.3% से घटकर करीब 20.7% हो सकता है, लेकिन सरकार कह रही है कि कोई राज्य नुकसान में नहीं आएगा. दक्षिणी राज्य (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र, तेलंगाना) कह रहे हैं कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण किया, फिर भी सीटें कम पड़ जाएंगी.























