एक्सप्लोरर

Delimitation Bill: क्या दक्षिण से ज्यादा नुकसान में उत्तर भारत? 1951-1971 के परिसीमन आंकड़े बताते हैं अलग कहानी

Delimitation Bill: परिसीमन बिल की चर्चा से दक्षिण राज्यों को टेंशन शुरू हो गई है, जबकि परिसीमन के इतिहास में हर बार नुकसान उत्तर भारत का ज्यादा हुआ है. आंकड़े चौंकाने वाले जरूर हैं, लेकिन सच हैं.

डेलिमिटेशन बिल पर दक्षिण भारत में खासा आक्रोश है क्योंकि नेताओं को डर है कि उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व घट जाएगा और हिंदी बेल्ट का बढ़ जाएगा, लेकिन 1951 के बाद से हर जनगणना के बाद सीटें बदलती थीं, तब हिंदी बेल्ट का लोकसभा में हिस्सा दक्षिण से कहीं ज्यादा गिरता था. 1951 में भारत का नक्शा आज जैसा नहीं था. भाषाई राज्यों का पुनर्गठन 1956 में हुआ था, इसलिए तुलना मुनासिब नहीं. लोकसभा सीटों का बंटवारा कभी भी सिर्फ उत्तर बनाम दक्षिण का सरल खेल नहीं रहा, बल्कि राज्य पुनर्गठन, UTs का विकास और पूरे संघीय ढांचे का विकास इसमें शामिल रहा है, लेकिन कैसे? एक्सप्लेनर में समझते हैं...

सवाल 1: 1951 और 1977 के बीच लोकसभा सीटों का बंटवारा कैसे तय होता था?
जवाब: 1951 से 1977 तक भारत में लोकसभा सीटों का बंटवारा हर जनगणना (1951, 1961 और 1971) के बाद संसद में आबादी के आधार पर फिर से तय किया जाता था. उस समय कुल सीटें भी बदलती रहती थीं और हर बार नए चुनाव से पहले डेलिमिटेशन कमीशन काम करता था. ठीक इसी अवधि में दोनों इलाकों का कुल हिस्सा घटा, लेकिन हिंदी बेल्ट की गिरावट 3.1 प्रतिशत पॉइंट, दक्षिण के 1.2 प्रतिशत पॉइंट से बहुत ज्यादा थी.

यह गिरावट इसलिए नहीं हुई क्योंकि दक्षिण ने हिंदी बेल्ट का हिस्सा छीना, बल्कि यूनियन टेरिटरीज को लोकसभा में ज्यादा प्रतिनिधित्व देने और पश्चिमी तथा पूर्वी राज्यों के बढ़ते हिस्सों की वजह से थी. 1951 का चुनाव भाषाई पुनर्गठन से पहले हुआ था, इसलिए राज्य सीमाएं आज जैसी नहीं थीं. 1956 के बाद राज्य आज की शक्ल में आए, लेकिन फिर भी कई UTs का प्रतिनिधित्व कम था. 1977 के बाद से सीटों का बंटवारा फ्रीज हो गया, ताकि परिवार नियोजन को बढ़ावा मिले और राज्यों को आबादी कंट्रोल करने का इनाम मिले. उस समय से लोकसभा की 543 सीटें लगभग वही हैं. 1951 और 1957 के आंकड़े सीटों के हैं, न कि निर्वाचन क्षेत्रों के, क्योंकि कुछ क्षेत्रों से दो सदस्य चुने जाते थे.

सवाल 2: हिंदी बेल्ट और दक्षिण भारत से ठीक-ठीक कौन से राज्य शामिल हैं और सीट फ्रीज क्यों था?
जवाब: हिंदी बेल्ट में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और दिल्ली जैसे हिंदी भाषी राज्य और क्षेत्र शामिल माने जाते हैं. वहीं, दक्षिण भारत में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल शामिल हैं.

1976 में इंदिरा गांधी सरकार ने 42वें संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा सीटों का बंटवारा 1971 की जनगणना के आधार पर फ्रीज कर दिया. इसका मकसद राज्यों को परिवार नियोजन को गंभीरता से लेने के लिए प्रोत्साहित करना था. अगर सीटें हर जनगणना के बाद आबादी के हिसाब से बदलती रहतीं, तो आबादी ज्यादा बढ़ाने वाले राज्यों को ज्यादा सीटें मिलतीं और कम आबादी बढ़ाने वाले को नुकसान होता. फ्रीज की नीति ने दक्षिण के राज्यों को 'इनाम' दिया क्योंकि उन्होंने आबादी नियंत्रण में बेहतरीन काम किया. 1971 से अब तक 543 सीटों का बंटवारा वही है, भले ही देश की आबादी 55 करोड़ से बढ़कर 140 करोड़ हो गई. अब 2026 का बिल इसी फ्रीज को खत्म करके नई शुरुआत कर रहा है.

सवाल 3: तो क्या डेलिमिटेशन बिल और दक्षिण का हिस्सा बढ़ाएगा या घटा देगा?
जवाब: 16 अप्रैल 2026 को सरकार ने डेलिमिटेशन बिल 2026 और संविधान (131वां संशोधन) बिल पेश किया है. इसका मकसद लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाकर लगभग 850 करना है (815 राज्यों के लिए और 35 UTs के लिए). बंटवारा 2011 की जनगणना के आधार पर होगा और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण भी इसी के साथ लागू होगा.

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में साफ कहा कि दक्षिण के पांच राज्यों की मौजूदा 129 सीटें बढ़कर 195 हो जाएंगी. हिस्सा 23.76 प्रतिशत से बढ़कर 23.87 प्रतिशत या लगभग 24 प्रतिशत हो जाएगा. उन्होंने कहा कि यह 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी है और कोई राज्य अपना अनुपात नहीं खोएगा.

हालांकि, तमिलनाडु के एमके स्टालिन और दक्षिण राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत अन्य विपक्षी दल कह रहे हैं कि सिर्फ आबादी के आधार पर बंटवारा सजा जैसा है. उन्होंने पिछले 50 साल में परिवार नियोजन में बेहतरीन काम किया, आबादी कंट्रोल की, लेकिन अब उसी की वजह से राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी. वे तर्क देते हैं कि दक्षिण GDP में 30-31 प्रतिशत योगदान देता है, लेकिन आबादी सिर्फ 20-21 प्रतिशत है.

सवाल 4: अगर बिल पास हो गया तो 2029 चुनाव में क्या बदल जाएगा?
जवाब: एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर बिल पास होता है तो 2029 के लोकसभा चुनाव से नई सीटें लागू हो सकती हैं. हिंदी बेल्ट की आबादी ज्यादा बढ़ने के कारण उसकी सीटें ज्यादा बढ़ेंगी, लेकिन दक्षिण का प्रतिशत हिस्सा लगभग स्थिर रहेगा या थोड़ा बढ़ेगा. सरकार का वादा है कि कोई राज्य नहीं हारेगा, बल्कि सबकी सीटें बढ़ेंगी और विकास तथा आबादी नियंत्रण दोनों को बैलेंस किया जाएगा. हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि अगर भविष्य में और जनगणनाएं होती हैं तो आबादी वाले राज्यों का दबदबा और बढ़ सकता है.

1951-1977 का डेटा साबित करता है कि लोकसभा का बंटवारा कभी भी सिर्फ उत्तर बनाम दक्षिण का खेल नहीं रहा. UTs, राज्य पुनर्गठन और दूसरे इलाकों का विकास भी हमेशा असर डालता रहा. 1976 की फ्रीज नीति ने परिवार नियोजन को बढ़ावा दिया, जो दक्षिण का सबसे बड़ा योगदान है. 2026 का बिल 1971 के बाद पहला बड़ा बदलाव लाएगा. असली सवाल यह है कि हम सिर्फ आबादी को देखें या GDP, परिवार नियोजन, आर्थिक योगदान और संघीय भावना को भी ध्यान में रखकर बंटवारा करें.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

भारत-नेपाल सीमा पर SSB ने अमेरिकी नागरिक को पकड़ा, बिना वैध कागजात नेपाल में घुसने की कर रहा था कोशिश
भारत-नेपाल सीमा पर SSB ने अमेरिकी नागरिक को पकड़ा, बिना वैध कागजात नेपाल में घुसने की कर रहा था कोशिश
रंगारेड्डी में छह लोगों की जान लेने वाले हत्यारे राजकुमार ने कर ली आत्महत्या, पुलिस ने शव किया बरामद
रंगारेड्डी में छह लोगों की जान लेने वाले हत्यारे राजकुमार ने कर ली आत्महत्या, पुलिस ने शव किया बरामद
शरीर पर 51 बार चाकू से गोदा और नाले में बहाया शव…, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगे के खौफनाक मर्डर की कहानी
शरीर पर 51 बार चाकू से गोदा, नाले में बहाया शव…, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगे के खौफनाक मर्डर की कहानी
सुप्रीम कोर्ट में CJI के सामने महिला ने उतारा मंगलसूत्र, गिड़गिड़ाते हुए कहा- माईलॉड! हमारा पूरा परिवार...
CJI के सामने महिला ने उतारा मंगलसूत्र, गिड़गिड़ाते हुए कहा- माईलॉड! हमारा पूरा परिवार...
Advertisement

वीडियोज

Evil Dead Burn देखने से पहले 100 बार सोचिए!
Tata Sierra EV Pros and Cons plus which battery pack to buy? #tata #tatasierraev #autolive
E20 Petrol का Confusion! क्यों बढ़ गई Premium Petrol की Demand? #e20petrol #autolive
Gold Price Crash: सोने-चांदी के दामों में भयंकर गिरावट! खरीदने का सबसे सही मौका? ABPLIVE
Bollywood News: आकांक्षा रंजन और शरण शर्मा के ग्रैंड वेडिंग रिसेप्शन में सितारों का जमावड़ा, ग्लैमर ने लूटी महफिल (13.07.26)
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
सुप्रीम कोर्ट में CJI के सामने महिला ने उतारा मंगलसूत्र, गिड़गिड़ाते हुए कहा- माईलॉड! हमारा पूरा परिवार...
CJI के सामने महिला ने उतारा मंगलसूत्र, गिड़गिड़ाते हुए कहा- माईलॉड! हमारा पूरा परिवार...
सपा का दावा- निशिकांत दुबे ने मांगी माफी, BJP सांसद बोले, 'मैंने अखिलेश यादव जी से...'
सपा का दावा- निशिकांत दुबे ने मांगी माफी, BJP सांसद बोले, 'मैंने अखिलेश यादव जी से...'
वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी पर लगे चीटिंग के आरोप, साथी खिलाड़ी से अफेयर; क्रिकेट जगत में मची खलबली
वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी पर लगे चीटिंग के आरोप, साथी खिलाड़ी से अफेयर
Monday BO Collection Updates: 'धमाल 4' ने मंडे को भी सबको चटाई धूल, 'लेनिन' का जलवा बरकरार, जानें कलेक्शन
बॉक्स ऑफिस: 'धमाल 4' ने मंडे को भी सबको चटाई धूल, 'लेनिन' का जलवा बरकरार, जानें कलेक्शन
शेख हमद बिन ने कैसे खड़ी की कतर की अर्थव्यवस्था? इन वजह से टॉप इकोनॉमी में शुमार हुआ उनका देश
शेख हमद बिन ने कैसे खड़ी की कतर की अर्थव्यवस्था? इन वजह से टॉप इकोनॉमी में शुमार हुआ उनका देश
1200 से ज्यादा सरकारी नौकरियों का सुनहरा मौका, ITI से लेकर इंजीनियरिंग और CA तक कर सकते हैं आवेदन
1200 से ज्यादा सरकारी नौकरियों का सुनहरा मौका, ITI से लेकर इंजीनियरिंग और CA तक कर सकते हैं आवेदन
Video: प्रेग्नेंट बेटी को सरप्राइज देने बेंगलुरु से कनाडा पहुंच गए मां बाप, सरप्राइज देख भावुक हुआ इंटरनेट
प्रेग्नेंट बेटी को सरप्राइज देने बेंगलुरु से कनाडा पहुंच गए मां बाप, सरप्राइज देख भावुक हुआ इंटरनेट
Pregnancy in Monsoon: मानसून में कैसे रखें गर्भ में पल रहे बच्चे का ख्याल, Mother to be के लिए बड़े काम की है खबर
मानसून में कैसे रखें गर्भ में पल रहे बच्चे का ख्याल, Mother to be के लिए बड़े काम की है खबर
Embed widget