Caste Census: ‘कोई कंफ्यूजन नहीं, यह सुनिश्चित है’, जातिगत जनगणना को लेकर लोकसभा में बोले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
Amit Shah on Caste Census: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत में जनगणना साल 2021 में ही होनी थी, लेकिन देश उस वक्त कोविड-19 से जूझ रहा था, इसलिए जनगणना सफल नहीं हो पाई.

- महिला आरक्षण बिल पर अमित शाह ने लोकसभा में सरकार का पक्ष रखा।
- गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि जातिगत जनगणना निश्चित रूप से होगी।
- शाह ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण 2021 की जनगणना रुकी।
- विपक्ष पर आरोप, वे उत्तर-दक्षिण में भेद करना चाहते हैं।
Women Reservation Bill: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) को लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक यानी महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार का पक्ष रखा. इस दौरान उन्होंने महिला आरक्षण के उद्देश्य, सीटों की संख्या में वृद्धि और परिसीमन के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के भी जवाब दिए. वहीं, इस दौरान उन्होंने देश में जातिगत जनगणना को लेकर भी बड़ी बात कही है.
उन्होंने कहा है कि जातिगत जनगणना में किसी तरह का कोई कंफ्यूजन नहीं है. जब लोगों की गणना शुरू होगी, तो जाति की गणना भी होगी, यह सुनिश्चित है.
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देश में समय पर क्यों नहीं हुई जनगणना?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन को बताया कि भारत में साल 2021 में जो जनगणना होनी थी, लेकिन वो समय पर क्यों नहीं हुई. उन्होंने कहा कि देश में 2021 में भी जनगणना होनी थी, लेकिन उस वक्त देश में कोरोना महामारा (कोविड-19) आया था और देश उसी संकट से जूझ रहा था. भारत को कोविड-19 महामारी से पूरी तरह से उबरने में काफी समय लग गया, इसलिए देश में उस वक्त जनगणना नहीं हो पाई. फिर 2024 में समय आया, तो राजनीतिक दलों ने जातिगत जनगणना की बात कही, हमने लोगों से बात की और यह फैसला किया कि जातिगत जनगणना की जाएगी. उन्होंने कहा कि जब देश में लोगों की गणना शुरू होगी, तब जाति की गणना भी होगी, यह सुनिश्चित है. जातिगत जनगणना को लेकर किसी तरह का कोई कंफ्यूजन नहीं है.
वो उत्तर-दक्षिण में भेद करना चाहते हैं, हम नहीं- शाह
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनको जाति जनगणना से कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें यहां बैठना है, जो कभी नहीं होगा. देश को नैरेटिव के जरिए टुकड़े-टुकड़े नहीं करना चाहिए. हम शपथ लेते हैं तो मन से लेते हैं, वो उत्तर-दक्षिण का भेद करना चाहते है, हम नहीं.
उन्होंने आगे कहा कि मैं शांति से समझा रहा हूं, नैरैटिव फैलाया जा रहा है कि इससे दक्षिण का नुकसान होगा, ये गलत है. दक्षिण के पांच राज्य जो कि काल्पनिक बनाए गए हैं, पांचों की सीटें नए परिसीमन के बाद 23.76 से 23.87 प्रतिशत हो जाएंगी.
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