Women Reservation Bill: संविधान संशोधन विधेयक 2026 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. महिला आरक्षण को लागू करने को लेकर बुधवार को बुलाई गई विपक्षी नेताओं की बैठक में सभी दलों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. इस बैठक के बाद जहां समाजवादी पार्टी के सांसद रामशंकर राजभर ने कहा कि वे परिसीमण का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह महिला आरक्षण चाहते हैं, लेकिन ये बिल ठीक नहीं है. विपक्षी बैठक में शामिल हुए सीपीआई से एनी राजा ने बताया वे परिसीमन का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि विधेयक में आरक्षण का स्वरूप ठीक नहीं है.

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विशेष सत्र से एक दिन पहले विपक्षी दलों ने रणनीति तय करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अहम बैठक बुलाई गई. यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई, जिसमें विपक्षी नेता राहुल गांधी, आरजेडी नेता तेजस्वी यादवसमेत कई बड़े नेता शामिल हुए. बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सीपीएमएल महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य वर्चुअली जुड़े, जबकि आम आदमी पार्टी ने महिला आरक्षण संशोधन पर विपक्ष के साझा रुख का समर्थन करने का संकेत दिया. 

अकाली दल का विरोध

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शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण के साथ परिसीमन को जोड़ने का विरोध किया है. पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों के परिसीमन का विरोध करती है. उनका तर्क है कि इससे जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों जैसे पंजाब को नुकसान और अन्य राज्यों को फायदा होगा.

वहीं उमर अब्दुल्ला ने INDIA Alliance के सभी दलों से इस विधेयक पर सामूहिक रुख अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि संसद में- चाहे लोकसभा हो या राज्यसभा- विपक्ष को एकजुट होकर अपनी रणनीति तय करनी होगी. परिसीमन को लेकर उन्होंने 2023 के जम्मू-कश्मीर अनुभव का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि क्या यह प्रक्रिया आम मतदाताओं के हित में है या भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए.

अन्य नेताओं की मौजूदगी

इस अहम बैठक में शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे, संजय राउत, टीआर बालू, Annie Raja, Mohammad Basheer और सुप्रिया सुले भी शामिल हुए. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर विपक्ष की संयुक्त रणनीति तय करना है, ताकि संसद के विशेष सत्र में सरकार का एकजुट होकर सामना किया जा सके. यह बैठक विपक्षी एकता की परीक्षा भी मानी जा रही है, जहां से आगे की राजनीतिक दिशा तय होगी.

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