लोकसभा में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने से जुड़े संविधान संशोधन पर राजनीतिक गतिरोध के बाद अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह व्यवस्था कब लागू हो पाएगी. मौजूदा परिस्थितियों में यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू होना मुश्किल हो सकता है. इसकी मुख्य वजह यह है कि 2023 के कानून के प्रावधानों के तहत आरक्षण लागू करने से पहले नई जनगणना और उसके आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया अनिवार्य मानी गई है.

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संसद की तरफ से 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून (जिसे आम तौर पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा जाता है) में स्पष्ट प्रावधान है कि आरक्षण लागू करने से पहले देश में अगली जनगणना कराई जाएगी और उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा. यही आयोग तय करेगा कि किन-किन लोकसभा सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर दो से ढाई साल का समय लग सकता है.

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केंद्र सरकार को क्या तर्क दे रही विपक्षी दल

विपक्ष का तर्क रहा है कि सरकार अगर सच में महिला आरक्षण लागू करना चाहती है तो इसे मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही लागू कर सकती है और इसके लिए परिसीमन का इंतजार जरूरी नहीं है. विपक्ष ने 2011 की जनगणना के आधार पर ही सीटों के आरक्षण की मांग उठाई थी, ताकि 2029 तक महिलाओं को इसका लाभ मिल सके. हालांकि, कानून और संविधान के जानकारों का मानना है कि बिना परिसीमन के सीटों का आरक्षण तय करना कानूनी रूप से जटिल और विवादित हो सकता है. असल में किसी भी सीट को आरक्षित घोषित करने का अधिकार परिसीमन आयोग के पास होता है, जो जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करता है. ऐसे में चाहे मौजूदा 543 सीटों पर आरक्षण देना हो या भविष्य में सीटों की संख्या बढ़ाकर, दोनों ही स्थितियों में परिसीमन प्रक्रिया आवश्यक होगी. इसलिए विपक्ष की यह मांग व्यावहारिक रूप से सरल नहीं मानी जा रही.

परिसीमन को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद

परिसीमन को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद भी सामने आया है. दक्षिण भारत के कई राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से उनकी लोकसभा सीटों की संख्या घट सकती है, जबकि उत्तर भारत के राज्यों की सीटें बढ़ सकती हैं. उदाहरण के तौर पर, 2011 की जनगणना के आधार पर देखें तो  राजस्थान और तमिलनाडु की जनसंख्या में अंतर अपेक्षाकृत कम है, लेकिन वर्तमान में तमिलनाडु के पास 39 सीटें हैं, जबकि राजस्थान के पास 25 सीटें हैं. नए परिसीमन में यह संतुलन बदल सकता है और राजस्थान और तमिलनाडु की सीट लगभग बराबर हो सकती है यानी कि राजस्थान को मिलेगा फायदा और तमिलनाडु को लोकसभा सीटों का  होगा नुकसान.

वंदन अधिनियम संशोधन को लेकर सरकार का बयान

सरकार नई वंदन अधिनियम संशोधन जो बिल लेकर आई थी, उसमें सरकार की तरफ से यह भरोसा भी दिया जा रहा था कि परिसीमन के दौरान सभी राज्यों की सीटों में 50 फीसदी की संतुलित वृद्धि की जाएगी, ताकि किसी क्षेत्र के प्रतिनिधित्व में अचानक कमी न आए. इसके बावजूद, राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई और बिल लोकसभा में गिर गया. समय-सीमा की बात करें तो अगर 2023 में पास हुए कानून के हिसाब से 2027 में जनगणना पूरी होगी और उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होता है तो पूरी प्रक्रिया 2030 के आसपास ही पूरी हो पाएगी. ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू होने की संभावना बेहद कम नजर आती है और इसका वास्तविक प्रभाव 2030 के बाद होने वाले चुनाव में ही देखने को मिल सकता है.

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