देहरादून में आसमान बादलों से घिरा है, रह-रहकर बारिश हो रही है और मैदान फिसलन भरा है, लेकिन भारतीय सैन्य अकादमी के ड्रिल स्क्वायर पर कदमताल थमने का नाम नहीं ले रही. भीगी वर्दियों में घंटों से अभ्यास कर रहे जेंटलमैन कैडेट और महिला कैडेट के चेहरों पर थकान भले दिखे, लेकिन आंखों में जो चमक है वो बारिश से बुझने वाली नहीं.

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13 जून को होने वाली पासिंग आउट परेड IMA के 94 साल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है. इस बार पहली बार महिला कैडेट भी पुरुष जेंटलमैन कैडेट्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ड्रिल स्क्वायर पर उतरेंगी. यह महज एक परेड नहीं यह उस बदलाव का सार्वजनिक ऐलान है, जो भारतीय सेना के भीतर धीरे-धीरे, लेकिन मजबूती से आ रहा है.

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NDA से IMA तक - एक लंबी और कठिन राहइन महिला कैडेट्स का सफर यहां अचानक नहीं शुरू हुआ. अगस्त 2022 में जब राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पुणे के दरवाजे पहली बार महिलाओं के लिए खुले, तब इन्होंने उस मौके को दोनों हाथों से थामा. तीन साल का कठिन प्रशिक्षण, मई 2025 में NDA से स्नातक और फिर आठ कैडेटों ने भारतीय सेना को अपना रास्ता चुना. 15 जुलाई 2025 को IMA में प्रवेश लिया और एक साल के गहन सैन्य प्रशिक्षण के बाद अब वे उस आखिरी कदम के लिए तैयार हैं जिसे 'अंतिम पग' कहते हैं.

'अंतिम पग'  जहां कैडेटअधिकारी बनता हैपासिंग आउट परेड का सबसे भावुक और यादगार लम्हा यही होता है. जब कैडेट वह आखिरी कदम उठाता है और प्रशिक्षु से सैन्य अधिकारी बन जाता है. परिवारों की आंखें नम होती हैं, सीने गर्व से चौड़े होते हैं. इस बार जब महिला और पुरुष कैडेट साथ-साथ यह कदम उठेंगे तो IMA का ड्रिल स्क्वायर सिर्फ एक परेड ग्राउंड नहीं रहेगा वह उस हर लड़की का प्रतिनिधित्व करेगा जो कभी वर्दी में देश सेवा का सपना देखते हुए बड़ी हुई.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लेंगी सलामीइस ऐतिहासिक परेड को और गरिमामय बनाने के लिए देश की राष्ट्रपति और भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू स्वयं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी. वे परेड की सलामी लेंगी और नए अधिकारियों को संबोधित करेंगी. यह संयोग भी कम मायने नहीं रखता जिस परेड में पहली बार महिला कैडेट 'अंतिम पग' भरेंगी, उसकी सलामी लेने के लिए देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठी एक महिला मौजूद होंगी. यह तस्वीर अपने आप में एक संदेश है. बारिश रुके या न रुके, 13 जून की वह सुबह IMA के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगी. यह भी पढ़ें : ईरान-अमेरिका के बीच पाकिस्तान ने नहीं, फिर किसने कराई पीस डील, कौन रख रहा नजर? फाइनल समझौते से जुड़ी बड़ी बातें