नई दिल्ली: ग्राम पंचायत का पद बचाने के लिए खुद के बच्चे को अपना मानने से मना कर रही एक महिला की अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. महाराष्ट्र के नासिक से ग्राम पंचायत सदस्य चुनी गई महिला ने अपने तीसरे बच्चे की मां होने से इंकार किया था. लेकिन डीएनए जांच में उसका दावा झूठा निकला.

पद बचाने के लिए मां ने किया खुद के बच्चे को अपना मानने से इंकार

दरअसल, महाराष्ट्र स्थानीय निकाय में 2 से ज़्यादा बच्चे वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक है. इसी नियम से बचने के लिए महिला ने अपने तीसरे बच्चे को अपना मानने से मना किया था.

महिला ने सिर्फ 2 बच्चों की जानकारी देकर चुनाव लड़ा और जीत गई. बाद में उसके एक प्रतिद्वंद्वी ने अधिकारियों को शिकायत दी कि उसके 3 बच्चे हैं. जांच के बाद अधिकारियों ने शिकायत को सही पाया और महिला को चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दिया. इससे उसकी सदस्यता रद्द हो गई.

DNA टेस्ट में झूठा निकला महिला का दावा

महिला ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. वहां भी उसे राहत नहीं मिली. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची महिला ने दलील दी कि वो अपना और बच्चे का डीएनए टेस्ट करवाने को तैयार है. सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानते हुए दिसंबर में डीएनए टेस्ट का आदेश दिया.

डीएनए रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि बच्चा महिला और उसके पति का ही है. रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए जस्टिस कुरियन जोसफ और आर भानुमति की बेंच ने महिला की अपील खारिज कर दी.