किसान संगठन और सरकार के बीच शुक्रवार को ग्यारहवें दौर की बेनतीजा बातचीत के बाद विवाद और गहरा गया है. केन्द्र सरकार की तरफ से तीनों कानूनों को डेढ साल तक लागू ना करने के नए प्रस्ताव के बावजूद किसानों की तरफ से उसे ठुकरा कर तीनों कानूनों की वापसी और एमएसपी को कानून का हिस्सा बनाने की मांग की गई.
शुक्रवार को किसान नेता तीनों विवादित कृषि कानूनों की वापसी की अपनी जिद पर अड़े रहे. इसके बाद केन्द्र सरकार ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. सरकार की तरफ से यह कहा गया है कि अगले दौर की वार्ता अब तभी होगी अगर किसान नेताओं की तरफ से कृषि कानूनों को दो साल तक लागू करने से रोकने के प्रस्ताव को स्वीकार किया जाएगा.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, "भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा- बैठक के दौरान सरकार ने दो साल तक कृषि कानूनों को के लागू करने पर रोक का प्रस्ताव दिया और कहा कि अगले दौर की वार्ता तभी होगी जब किसान संगठन इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार होंगे."
समाचार एजेंसी पीटीआई ने किसान नेताओं का हवाला दिया है, जिसमें उन्होंने कहा- सरकार का रवैया बातचीत के दौरान सही नहीं था. उधर, समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बात करते हुए कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा- “किसान नेताओं के दिल की बातों में किसानों के कल्याण की बात नहीं थी.
उन्होंने कहा- हमने उनसे कहा कि हमारे प्रस्ताव के बारे में विचार करें (2 महीने कानूनों की रोक को लेकर) क्योंकि यह किसान और देश दोनों के हितों में है. हमने उनसे कहा कि वह कल तक अपने फैसले के बारे में बताएं.” उधर, सरकार से बातचीत नहीं बनने की सूरत में किसानों ने बातचीत शुरू होने से पहले ही गणतंत्र दिवस पर परेड निकालन की धमकी दी थी.
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