Kerala New CM: केरल की राजनीति का नया युग: जानिए कौन है नए सीएम वी.डी. सतीशन
एक प्रखर वक्ता और रणनीतिकार वी. डी. सतीशन का जन्म 1964 में कोच्चि के नेत्तूर में हुआ था और उन्होंने छात्र राजनीति (NSUI) से अपने करियर की शुरुआत की थी. वह छह साल से परावुर के विधायक हैं.

कांग्रेस ने गुरुवार (14 मई, 2026) को केरल के नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर दी है. वीडी सतीशन केरल के नए मुख्यमंत्री होंगे. वीडी सतीशन केरल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं और लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. उनका पूरा नाम वी. डी. सतीशन (Vadassery Damodaran Satheesan) है.
वी. डी. सतीशन पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण के करीबी समर्थक माने जाते रहे हैं. वह कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं और 2021 में केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर भी काम कर चुके हैं. वह केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं. इसके अलावा, वह पेशे से वकील हैं और केरल हाईकोर्ट में वकालत भी कर चुके हैं.
छह साल से परावुर सीट से विधायक हैं सतीशन
वी.डी. सतीशन, जिन्हें केरल की राजनीति का 'जुआरी' भी कहा जा रहा है, आज राज्य के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बनकर उभरे हैं. पेशे से वकील और परावुर निर्वाचन क्षेत्र से लगातार छह बार के विधायक, सतीशन ने 2026 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को एक अभूतपूर्व जीत दिलाई है.
100 सीटों का साहसी जुआ सतीशन की इस जीत की सबसे बड़ी विशेषता उनका वह आत्मघाती दांव था, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि अगर यूडीएफ 140 में से 100 सीटें नहीं जीतता है, तो वह राजनीति छोड़ देंगे और 'वनवास' (राजनीतिक निर्वासन) पर चले जाएंगे.
NSUI से की राजनीतिक सफर की शुरुआत
एक प्रखर वक्ता और रणनीतिकार सतीशन का जन्म 1964 में कोच्चि के नेत्तूर में हुआ था और उन्होंने छात्र राजनीति (NSUI) से अपने करियर की शुरुआत की थी. वह 2001 से लगातार परावुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. सतीशन का राजनीतिक आधार एर्नाकुलम जिले की परावुर विधानसभा सीट रही है. वह लगातार छह साल से परवूर के विधायक हैं. हालांकि, यहां से पहला चुनाव उन्होंने साल 1996 के दशक में लड़ा था, लेकिन तब वह हार गए थे.
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छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत करने वाले सतीशन को कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और जमीनी राजनीति दोनों में मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है. वह एस.एच. कॉलेज, थेवरा और महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी में छात्र नेता रहे. केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) और यूथ कांग्रेस में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई.
25 सालों से केरल की राजनीति में एक्टिव हैं वी. डी. सतीशन
25 सालों से ज्यादा समय से वी. डी. सतीशन केरल की राजनीति में सक्रिय हैं. कांग्रेस के अंदर उन्हें सुधारवादी सोच वाले नेता के तौर पर देखा जाता है. 2021 में यूडीएफ की हार के बाद, उन्हें प्रतिपक्ष का नेता (LoP) नियुक्त किया गया था. विपक्ष का नेता बनने के बाद वी. डी. सतीशन ने पिनरई विजयन सरकार को भ्रष्टाचार, गोल्ड स्मगलिंग, कानून-व्यवस्था और आर्थिक मुद्दों पर घेरा.
वी. डी. सतीशन ने न सिर्फ गठबंधन के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्टी को फिर से सक्रिय किया. उन्हें उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि और प्रखर संसदीय हस्तक्षेपों के लिए जाना जाता है. वह एक 'बुकवर्म' (किताबी कीड़ा) राजनेता के रूप में भी प्रसिद्ध हैं, जिन्होंने 2025 में ही 60 से अधिक पुस्तकें पढ़ी थीं.
नई पीढ़ी के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं वी. डी. सतीशन
सतीशन की पहचान एक आक्रामक वक्ता और सरकार को घेरने वाले विपक्षी नेता के रूप में बनी. केरल में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक फैसलों और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर उन्होंने लगातार वाम सरकार को चुनौती दी. पार्टी के भीतर भी उन्हें नई पीढ़ी के प्रभावशाली नेताओं में शामिल किया जाता है.
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प्रमुख मुद्दों पर सतीशन ने मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की सरकार के खिलाफ कई कड़े मोर्चे खोले. उन्होंने सिल्वरलाइन (Silverline) रेल परियोजना का पुरजोर विरोध किया और इसे केरल के लिए 'विनाशकारी' बताया. हाल ही में, उन्होंने 2026 के केरल बजट की भी तीखी आलोचना की और इसे 'खाली खजाने' वाला एक अविश्वसनीय राजनीतिक दस्तावेज करार दिया. उन्होंने विजयन को सार्वजनिक बहस की चुनौती भी दी थी, जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया था. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सतीशन को आगे बढ़ाना कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा माना जाता है, जिसमें पार्टी अनुभवी लेकिन अपेक्षाकृत युवा चेहरों को नेतृत्व की भूमिका देना चाहती है.


























