2006 बैच की आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर ने सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के आईजी का पद संभाल लिया है. संजुक्ता कमांडो फोर्स का नेतृत्व करने वाली देश की पहली महिला ऑफिसर बन गई हैं. संजुक्ता को लोग प्यार से आयरन लेडी ऑफ असम भी कहते हैं. उन्होंने असम के जंगलों में उग्रवादियों के खिलाफ खुद मोर्चे पर डटकर संजुक्ता ने लोहा मनवाया है. इनके कंधों पर देश की सबसे खतरनाक फोर्स की कमान सौंपी गई हैं. आइए आपको आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर के बारे में बताते हैं.
कौन हैं आईपीएस संजुक्ता पराशरअसम में जन्मी संजुक्ता पराशर ने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशंस में पीएचडी किया है. है. साल 2006 में संजुक्ता की यूपीएससी की परीक्षा में ऑल इंडिया 85वीं रैक हासिल की थी. वो चाहती तो आईएएस बन सकती थीं मगर उन्होंने आईपीएस चुना. वो देश की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहती हैं.
2015 में किया उग्रवादी विरोधी ऑपरेशनसंजुक्ता की पहली पोस्टिंग 2008 में माकुम में असिस्टेंड कमांडेट के रूप में हुई थी. उसके बाद वो सोनितपुर में एसपी रहीं.इस दौरान बोडो उग्रवाद के खिलाफ अभियानों में उनकी भूमिका काफी चर्चित रही. 2015 में संजुक्ता के नेतृत्व में कई उग्रवादी विरोधी ऑपरेशन हुए.
क्या है कोबरा फोर्सघने जंगल जहां पर सूरज की किरणें भी नहीं छू पाती हैं, वहां बारूदी सुरंदों के जाल और घात लगाकर बैठे उग्रवादियों के बीच ऑपरेशन चलाना मुश्किल होता है. इसी जंगल की लड़ाई के लिए कोबरा के जाबांज तैयार किए जाते हैं. छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के घने जंगलों में नक्सलियों के लिए कोबरा फोर्स रहती है.
संजुक्ता को क्यों चुना गयासंजुक्ता राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए में बतौर डीआईजी रह चुकी हैं. उस दौरान उन्होंने कई आतंरी नेटवर्क और टेरर फंडिंग की कड़ियों को सुलझाया था.उग्रवादियों का खात्मा करने के साथ अपने तेज दिमाग से संजुक्ता दुश्मनों की चाल की सारी कड़ियां समझ जाती हैं. कोबरा फोर्स के लिए सिर्फ ताकत ही नहीं बल्कि खुफिया जानकारी और रणनीति की भी जरुरत होती है. संजुक्ता के पास दोनों हैं उनका ये ही कॉन्बिनेशन अब कोबरा फोर्स के काम आएगा.
