महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज होती दिख रही है. केंद्र सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ऐसा बयान दिया है, जिसे आने वाले समय में महिला आरक्षण कानून और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर नए सिरे से चर्चा की शुरुआत माना जा रहा है.
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान अन्नपूर्णा देवी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले महिला आरक्षण अधिनियम (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का विपक्ष ने पहले विरोध किया था. उन्होंने दावा किया कि उस समय विपक्ष ने विधेयक को खारिज करने की कोशिश की और उसके बाद सदन में मेजें थपथपाकर जश्न भी मनाया था.
अन्नपूर्णा देवी ने कहा, 'विपक्ष ने पहले महिला आरक्षण कानून के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. इसके बाद उन्हें समझ में आ गया कि महिलाएं बहुत सारी तकलीफें सह सकती हैं, लेकिन अपना अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकतीं. जब यह विधेयक पारित नहीं हुआ था, तब उन्होंने मेज थपथपाकर जश्न मनाया था.'
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि देश की महिलाओं ने इसका जवाब चुनावों में दिया है. उन्होंने कहा, 'देश की महिलाओं ने पश्चिम बंगाल और असम के चुनावों में उन्हें करारा जवाब दिया है. इसलिए हम आपके मंच के माध्यम से विपक्ष को सलाह देना चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करें.'
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अन्नपूर्णा देवी ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा दशकों से लंबित था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे वास्तविक रूप दिया. उनके अनुसार, 'यह कानून कई दशकों से लंबित था, लेकिन माननीय प्रधानमंत्री ने इसे ठोस स्वरूप दिया और हकीकत में बदल दिया.'
उन्होंने विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि महिलाओं को उनके अधिकार और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करना चाहिए. मंत्री ने कहा, 'विपक्ष को सहयोग करना चाहिए ताकि आने वाले समय में महिलाओं को उनके पूरे अधिकार और सशक्तिकरण का लाभ मिल सके.'
किरण रिजिजू ने बताया कब होगा पेश
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्थिति स्पष्ट की है. नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण या परिसीमन विधेयक लाने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि इन दोनों मुद्दों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी कोई चर्चा नहीं हुई है. हालांकि, रिजिजू ने दोहराया कि भाजपा नीत सरकार विधानमंडलों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है.
106वें संविधान संशोधन यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है. हालांकि, इसका क्रियान्वयन अभी टाल दिया गया है. सरकार ने इसे जल्द लागू करने के लिए 2026 में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश किया था, लेकिन अप्रैल 2026 में यह लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका. इसके चलते विधेयक पारित नहीं हो पाया और महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की सरकार की कोशिशों को झटका लगा. अब इस मुद्दे पर संसद के आगामी सत्रों में फिर बहस होने की संभावना है.
ADR की रिपोर्ट ने चौंकाया
महिला आरक्षण कानून लागू होने की उम्मीदों के बीच एडीआर की रिपोर्ट ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है. रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा चुनाव 2024 और उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में कुल 39,789 उम्मीदवारों में सिर्फ 4,073 महिलाएं थीं, यानी महज 10.2 प्रतिशत. लोकसभा चुनाव 2024 में 543 सीटों में से 152 सीटों पर एक भी महिला उम्मीदवार नहीं थी. भाजपा ने 16% और कांग्रेस ने 13% महिला उम्मीदवार उतारे, जबकि बीजेडी (33%), आरजेडी (29%) और टीएमसी (25%) इस मामले में आगे रहीं. रिपोर्ट बताती है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बावजूद 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का लक्ष्य अभी काफी दूर है.
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