नई दिल्लीः मुंबई के घाटकोपर इलाके में आज एक चार्टर्ड प्लेन के क्रैश होने से पायलट, को-पायलट और दो टेक्निशियन समेत 5 लोगों की मौत हो गई है. दो लोग घायल हो गए हैं. इस हादसे में एक राहगीर की जान चली गई. अब तक हादसे की वजह का पता नहीं चला है. एविएशन मिनिस्ट्री ने जांच के आदेश दे दिए हैं. इस प्लेन के क्रैश होने का कारण पता नहीं चल पाया है लेकिन इसका ब्लैक बॉक्स मिल गया है. ब्लैक बॉक्स मिलने से विमान के क्रैश होने की वजह का जल्द पता लगने की उम्मीद है. क्या होता है ब्लैक बॉक्स ब्लैक बॉक्स वो काले रंग का बॉक्स होता है जो फ्लाइट के दौरान के सभी अहम रिकॉर्ड को सुरक्षित रख लेता है. पायलट के आखिरी संवाद अगर इसमें दुर्घटना से पहले के आखिरी संवाद भी इसमें रिकॉर्ड हो जाते हैं. ब्लैक बॉक्स टाइटेनियम धातु का बना होता है और इसकी खास बात ये है कि दुर्घटना की स्थिति में ये पानी, चट्टान, जंगल कहीं भी गिरने पर भी पूरी तरह सुरक्षित रहता है और इसके जरिए विमान की दुर्गटना के कारणों का पता लगाया जा सकता है. ब्लैक बॉक्स ब्लैक बॉक्स के दो हिस्से फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (सीवीआर) होते हैं. फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) में विमान के ऊंचाई, तापमान, दिशा, हलचल जैसी आंतरिक तकनीकी फैक्टर्स को रिकॉर्ड करता है. किसी विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में जब ब्लैक बॉक्स मिलता है तो इससे पता चल सकता है कि विमान के भीतर उस समय कैसी स्थिति रही होगी. कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (सीवीआर) इसमें विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से दो घंटे पहले तक के पायलट, को-पायलट के सारी बातचीत रिकॉर्ड हो जाती है जिसके आधार पर ये पता लगाया जा सकता है कि आखिरी पलों में किस तरह की बातचीत पायलट के बीच में हो रही थी. इससे भी विमान क्रैश के कारणों को जाना जा सकता है. कॉकपिट एरिया के माइक्रोफोन के जरिए फोटो, अलार्म को भी कैप्चर कर लेता है जिसका बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है. प्लेन के इंस्ट्रूमेंट्स और सेंसेर्स के जरिए मिलने वाले डाटा से ब्लैक बॉक्स से मिलने वाले ऑडियो डाटा का मिलान करने के जरिए दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सकता है और इसके लिए इसके साथ क्रैश हुए स्थान के फोटो और अन्य सबूतों के जरिए प्लेन क्रैश या दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सकता है.