नई दिल्ली: लंबे कानूनी संघर्ष के बाद आज पश्चिम बंगाल में पंचायती चुनाव हुए, जिसमें 73 प्रतीशत वोटिंग दर्ज की गई. बंपर वोटिंग के बावजूद पूरा चुनाव हिंसा की भेंट चढ़ गया. राज्य के सात जिलों में हुई हिंसा में 13 लोगों की मौत हुई और 43 लोग घायल हुए हैं. पंचायती चुनाव में इस पैमाने पर हुई हिंसा इस बात की गवाह है कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था किस हाल में है. हिंसा किस दर्जे की थी इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि दक्षिण 24 परगना में सीपीएम के एक कार्यकर्ता को जिंदा जला दिया गया.

चुनाव में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किये जाने और पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्यों से 60 हज़ार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किये जाने के बावजूद उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, पूर्वी मिदनापुर, बर्दवान, नदिया, मुर्शिदाबाद और दक्षिणी दिनाजपुर जिलों में हिंसक झड़प हुई.

हिंसा के दौरान ज्यादातर मतदान केंद्रों को निशाना बनाया गया. तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पे हुईं. कई मतदान केंद्रों के पास देसी बम भी फेंके गए. इन सब के बीच अब इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है.

तृणमूल ने पंचायत चुनाव के दौरान आतंक का माहौल बनाया: येचुरी 

पंचायत चुनाव के दौरान हुई इस बड़ी हिंसा पर माकपा नेता सीताराम येचुरी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि आज पंचायत चुनाव के दौरान आतंक का माहौल पैदा कर दिया. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की इस टिप्पणी को भी खारिज किया कि वाम के शासन के दौरान भी हिंसा की घटना हुई थी. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो ममता बनर्जी राज्य में कभी सत्ता में नहीं आतीं.

बता दें कि इससे पहले आज तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा था कि राज्य में पंचायत चुनाव में हिंसा का इतिहास रहा है और वाम शासन की तुलना में कम हिंसा हुई है.

हिंसा के खिलाफ बोलते हुए माकपा के महासचिव येचुरी ने कहा, ‘‘इससे खुद पता चलता है कि वे रक्षात्मक हैं, कसूरवार हैं. जो हो रहा है मीडिया उसे दिखा रहा है. अगर यह वाम मोर्चा के शासन के दौरान होता तो तृणमूल कांग्रेस सरकार कभी बंगाल में नहीं आती और ममता बंगाल की मुख्यमंत्री नहीं बनतीं.’’

येचुरी यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, ‘‘पहले उन्होंने लोगों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिया. फिर, नामांकन के बाद तृणमूल कांग्रेस ने नामांकन वापसी के लिए उम्मीदवारों को धमकाया. जिन लोगों ने अपना नाम वापस नहीं लिया उनपर हमला हुआ. यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर कुठाराघात है. हम राष्ट्रपति शासन का समर्थन नहीं करते. माकपा लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी. लोकतांत्रिक प्रतिरोध शुरू हो चुका है और यही हमारा जवाब होगा.’’

उत्तर बंगाल विकास मंत्री रबींद्रनाथ घोष ने कार्यकर्ता को मारा थप्पड़

कूचबिहार जिले में उत्तर बंगाल विकास मंत्री रबींद्रनाथ घोष ने एक मतदान केंद्र के बाहर एक व्यक्ति को कथित तौर पर चांटा मारा. आयोग ने कहा कि उसे शिकायत मिली है और अधिकारियों से कार्रवाई करने के लिए कहा गया है.

टेलीविजन चैनलों ने दिखाया कि मंत्री ने व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मारा. हालांकि घोष ने दावा किया कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया.

हिंसा पर वकील की अपील को कलकत्ता हाईकोर्ट ने ठुकराया

चुनाव में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा और मौतों का जिक्र करते हुए एक वकील ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को वीडियो दिखाया और उनसे शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए राज्य चुनाव आयोग और राज्य के गृह सचिव को तलब करने की अपील की. लेकिन मुख्य न्यायाधीश जे भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अरजीत बनर्जी की बेंच ने एसईसी और गृह सचिव को सम्मन जारी करने से इनकार कर दिया.

मौखिक अर्जी पर विचार करने से इनकार करते हुए कोर्ट ने वकील सुप्रोदीप राय से याचिका दायर करने और उसमें अपने दावों का ब्योरा देने को कहा.

गौरतलब है कि बेंच ने शुक्रवार को कहा था कि अगर आज के पंचायत चुनाव में 2013 के चुनाव के मुकाबले जानमाल का अधिक नुकसान होता है तो एसईसी और राज्य के अधिकारियों को व्यक्तिगत रुप से जवाबदेह ठहराया जाएगा और उन्हें हर्जाना देना होगा.