पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर (SIR) मुद्दे को दिल्ली तक पहुंचा दिया है. सोमवार (2 जनवरी) को चुनाव आयोग के टॉप 3 अधिकारियों से मुलाकात के बाद उन्होंने खुली धमकी दी. ममता बनर्जी ने कहा कि मैं लाखों लोगों को दिल्ली लाकर चुनाव आयोग के सामने जुलूस निकलवा सकती हूं. 

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सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग अधिकारियों द्वारा संयम बरतने के बावजूद बंगाल की मुख्यमंत्री लगातार झूठे आरोप लगाती रहीं और यहां तक ​​कि उन्होंने मेज पर हाथ भी पटका. बंगाल बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा को ड्रामेबाजी करार दिया.

असम में SIR क्यों नहीं कराया- बनर्जीबंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी समेत सभी प्रमुख पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हैं. ऐसे में ममता बनर्जी चुनाव आयोग पर एसआईआर का दुरुपयोग कर वास्तविक मतदाताओं को बाहर करने का आरोप लगा रही हैं. अपनी बात मनवाने के लिए उन्होंने चुनाव आयोग से पूछा कि उन्होंने बीजेपी शासित असम में एसआईआर (SIR) क्यों नहीं कराया. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बंगाल और केरल को निशाना बना रहा है, इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने उन्हें बीजेपी का एजेंट बता दिया.

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'मैंने ऐसा चुनाव आयोग कभी नहीं देखा'चुनाव अधिकारियों से मिलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि मैंने ऐसा चुनाव आयोग कभी नहीं देखा, जो इतना अहंकारी हो. ये लोग बड़े झूठे हैं. हमने उनसे कहा कि हम अध्यक्ष का सम्मान करते हैं क्योंकि कोई भी पद किसी के लिए स्थायी नहीं होता. आपको भी एक दिन जाना होगा, लेकिन ऐसी मिसाल कायम न करें और बंगाल को बार-बार निशाना क्यों बनाया जा रहा है? 

तृणमूल विधायकों ने CEC के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया  ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेता विरोध जताने के लिए काली शॉल ओढ़कर दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के कार्यालय गए. वे अपने साथ कुछ ऐसे लोगों को भी लाए, जिनके बारे में ममता बनर्जी की टीम ने दावा किया कि वे एसआईआर प्रक्रिया से प्रभावित परिवार हैं. सूत्रों के मुताबिक बंगाल की मुख्यमंत्री के साथ आए तृणमूल विधायकों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपशब्द और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया.

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने ममता बनर्जी की टीम को बताया कि तृणमूल कार्यकर्ताओं और विधायकों ने बंगाल में चुनाव आयोग के कार्यालयों और इमारतों में कई बार तोड़फोड़ की है. उन्होंने बनर्जी को याद दिलाया कि एसआईआर प्रक्रिया में लगे अधिकारियों पर किसी भी तरह का दबाव, बाधा या हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए.

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