TMC टूटी तो रितब्रता बनर्जी को मिलेगी ये बड़ी जिम्मेदारी, ममता बनर्जी को झटका देने की इनसाइड स्टोरी
ममता बनर्जी की बुलाई बैठक में कई विधायकों के न पहुंचने के बाद पार्टी के भीतर कलह की खबरें खुलकर सामने आ रही हैं. पार्टी से निकाले गए विधायक रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा के संपर्क में कई विधायक हैं.

पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं. टीएमसी प्रमुख की बुलाई बैठक में कई विधायकों के न पहुंचने के बाद पार्टी के भीतर कलह की खबरें खुलकर सामने आ रही हैं. सूत्रों के मुताबिक टीएमसी से बाहर निकाले गए विधायक रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा के संपर्क में पार्टी के कई विधायक हैं. इन दोनों नेताओं को ममता बनर्जी ने कल (1 जून) को पार्टी से बाहर निकाल दिया था.
क्या टीएमसी में होंगे दो फाड़?
सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी की मीटिंग में कई विधायक शामिल नहीं हुए थे,लेकिन उन्होंने रितब्रता बनर्जी से मुलाकात की थी. एमएलए हॉस्टल में दो विधायकों के मिलने की खबर है, वहीं दोनों बागियों से कल (1 जून) को एक होटल में टीएमसी के 6 विधायकों के मिलने की भी चर्चा है. सूत्रों के मुताबिक बागी विधायकों का खेमा इस तैयारी में है कि अगर 40 से ऊपर विधायक उनके साथ आ जाएं तो बैठक बुलाकर किसी को TMC विधायक दल का नेता चुन लिया जाए और स्पीकर के पास जाकर नेता विरोधी पार्टी का दावा पेश करें. चर्चा है कि पार्टी टूटी तो रितब्रता बनर्जी को गुट की जिम्मेदारी मिल सकती है.
टीएमसी ने पार्टी से निकाला
बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुलासा किया था कि इन दोनों नेताओं ने टीएमसी की ओर से कथित तौर पर उनके हस्ताक्षरों की जालसाजी की शिकायत की थी. इसके बाद दोनों को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में टीएमसी ने निष्कासित कर दिया था.
विधायक दल के नेता से जुड़ा मामला
मामला टीएमसी के विधायक दल के नेता चुने गए शोभनदेव चट्टोपाध्याय से जुडा़ है. आरोप है कि स्पीकर को जो चिट्ठी सौंपी गई थी, उसमें 13 विधायकों के साइन किसी और ने किए थे. विधानसभा अध्यक्ष से की गई शिकायत के बाद मामले की जांच सीआईडी कर रही है. मामले में पूछताछ के लिए कल (1 जून) को अभिषेक बनर्जी को सीआईडी ने बुलाया था,लेकिन वह नहीं गया और समय मांगा. सीआईडी ने 8 जून को फिर समन किया है.
अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को लिखी थी चिट्ठी
अभिषेक बनर्जी ने ही विधायक दल के नेता और मुख्य सचेतक वाली चिट्टी स्पीकर को लिखी थी. इसमें विधायक के हस्ताक्षर वाला पन्ना उसके साथ लगाया था. वहीं 3 विधायकों ने CID को बताया के ये उनके हस्ताक्षर नहीं है.
कौन हैं रितब्रता बनर्जी?
रितब्रता बनर्जी पढ़ाई के दौरान सीपीआई के छात्र संगठन SFI के नेता रहे. आशुतोष कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह संगठन के महासचिव भी रहे. उनको पूर्व सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य का करीबी माना जाता था. 2014 में सीपीआई ने उनको राज्यसभा भेजा. 2020 तक इस पद पर रहे, लेकिन 2017 में सीपीआई(एम) ने उन पर लगे विभिन्न आरोपों के चलते उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया.
वे तीन साल तक राज्यसभा में स्वतंत्र सांसद रहे. आरजी कर दुष्कर्म और हत्याकांड के बाद जब जवाहर सरकार ने राज्यसभा से मध्यावधि इस्तीफा दे दिया तो ऋतब्रत तृणमूल के टिकट पर डेढ़ साल के लिए संसद के उच्च सदन में गए. बाद में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी उन्हें राज्य की राजनीति में लेकर आए और इस साल विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्हें पार्टी का टिकट दिया था.

























