नई दिल्लीः हाल ही में सेना के जवानों से जुड़ा एक वीडियो वायरल हो रहा था. जिस वीडियो में कश्मीर के लोग सीआरपीएफ के जवानों के साथ बदसलूकी कर रहे थे और अब सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो आया है जो कश्मीर के पत्थरबाजों को सेना का जवाब बताया जा रहा है. दावा है कि सेना ने जवानों के साथ हुए बुरे बर्ताव का मुंहतोड़ जवाब दिया है.
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें सेना की जीप के बोनट पर एक शख्स को रस्सियों से बांध दिया गया था. वो टायर के ऊपर बैठा दिख रहा है. लेकिन तस्वीर सुर्खियों में तब आई जब जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे ट्वीट करते हुए कहा, 'इस नौजवान को सेना ने बोनट पर इसलिए बांध दिया है ताकि जीप पर कोई पत्थर ना फेंक पाए. ये बेहद चौंकाने वाला है.'
उमर अब्दुल्ला के इस ट्वीट के बाद तस्वीर वायरल होने लगी और मुद्दा गर्म हो गया. राजनेता से लेकर अभिनेता तक इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देने लगे है.
कुछ ही देर बाद 11 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया. जिसमें गुजरती गाड़ी से एक चेतावनी दी जा रही थी कि पत्थर फेंकने वालों का यही हाल होगा. जो पत्थर फेकेंगा उसे ऐसे ही जीप के बोनेट पर बांध दिया जाएगा. जीप गुजरती है तो पीछे से एक बख्तरबंद गाड़ी भी गुजरती हुई दिखाई दे रही है.
ये गाड़ी जहां से गुजर रही है वहां इक्के दुक्के लोग हैं. इलाके की दुकानें बंद हैं गुजरती हुई इस गाड़ी और गूंजती हुई इस चेतावनी को लोग हैरान होकर देख रहे हैं और सुन रहे हैं.
बोनट पर जिस शख्स को बांधा गया है उसके और वीडियो में दिख रहे बाकी लोगों के कपड़ों को देखकर ये लग रहा है कि वीडियो कश्मीर का ही है.
इस वीडियो की एबीपी न्यूज ने पड़ताल शुरु की. इन तस्वीरों को शेयर करते हुए कुछ लोगों ने लिखा था कि इजरायल की सेना भी पत्थर फेंकने वालों के साथ ऐसा ही सलूक करती है ऐसे में हमें शक हुआ कि कहीं इजरायल के वीडियो को कश्मीर का बनाकर पेश तो नहीं किया जा रहा. हमने इंटरनेट पर इजरायल के वीडियो ढूंढने शुरू किए.
हमें एक तस्वीर मिली जिस पर सबसे ज्यादा विवाद हुआ था. इजरायल ने पत्थरबाजों के खिलाफ एक 13 साल के बच्चे को बोनट पर बिठाया था. उसका हाथ भी जीप पर बांध दिया गया था. तरीका जरूर एक जैसा लग रहा था लेकिन हमें वायरल वीडियो और इजरायल के वीडियो के बीच कोई समानता नहीं मिली.
हमने पड़ताल आगे बढ़ाई तो पता चला कि 9 अप्रैल को जब श्रीनगर में लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव हो रहा था उसी दिन श्रीनगर से सटे बडगाम इलाके से सेना के पास एक फोन आय़ा. फोन पर कहा गया कि बडगाम इलाके के एक पोलिंग स्टेशन पर उपद्रवी भीड़ हमला करने वाली है. पोलिंग स्टेशन पर चुनाव अधिकारियों के साथ केंद्रीय सुरक्षाबल के जवान भी फंसे हुए थे. मदद के लिए फोन किया गया था. सेना ने मदद के लिए टुकड़ी भेजी.
मिली जानकारी के मुताबिक सेना की टुकड़ी जब वहां पहुंची तो करीब 400-500 लोगों की भीड़ हाथों में लाठी डंडे और पत्थर लेकर उपद्रव कर रही थी. सेना के कंपनी कमांडर (यानि मेजर रैंक के अधिकारी) ने भीड़ में मौजूद एक उपद्रवी को पकड़कर अपनी जीप के बोनट पर बांध दिया ताकि पोलिंग अधिकारी, सीआरपीएफ के जवान और खुद अपनी टुकड़ी को वहां से निकालकर ले जाए. पड़ताल में हमें इसी वीडियो का एक और हिस्सा मिला जिसमें सेना की जीप के बाद बख्तरबंद गाड़ी के बाद एक प्राइवेट बस आती है. सूत्रों के मुताबिक इसी बस में पोलिंग अधिकारी और ईवीएम मशीन मौजूद थीं. और जिस जीप के बोनट पर शख्स को बांधा गया है उसी जीप में से एक जवान ये कहता हुआ निकल रहा है कि पत्थरबाजों का यही हाल होगा.
सेना ये काफिला जब निकल रहा था तो वहां खड़े लोगों में से कोई एक वीडियो बना रहा था.
बताया जा रहा है कि जीप के बोनट पर पत्थरबाज को बांधने का फैसला कंपनी कमांडर ने खुद लिया था. इसके लिए किसी सीनियर अधिकारी से इजाजत नहीं ली गई थी.
तारीख और इलाका दोनों घटनाओं का एक ही है लेकिन सेना ने बोनट पर पत्थरबाज को बांधने का फैसला पोलिंग अधिकारियों, सुरक्षाबलों और ईवीएम की सुरक्षा के लिए किया था. ये बदले के लिए की गई कार्रवाई नहीं थी.
एबीपी न्यूज की पड़ताल में वायरल वीडियो सच साबित हुआ है.