India US Relations: अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड जे. ऑस्टिन इन दिनों भारत दौरे पर आए हुए हैं, इस दौरान उन्होंने विश्व पटल पर तेजी से बदल रही स्थितियों को देखते हुए भारत के साथ रक्षा उत्पादन, रक्षा तकनीक के सेक्टर में नई परिस्थितियों के अनुरूप नई कहानी लिखे जाने को लेकर जोर दिया. दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने भविष्य के रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक नए रोड मैप के समापन की घोषणा की, उन्होंने तेजी से ट्रैकिंग प्रौद्योगिकी में सहयोग, एयर वॉर फेयर, लैंड मोबिलाइजेशन टेक्निक पर काम करने की बात कही, ,साथ ही उन्होंने खुफिया, निगरानी और टोही; युद्ध सामग्री, और समुद्र के नीचे के क्षेत्र में काम करने की बात कही.
अमेरिका को चीन से मिल रही है चुनौतीदुनिया के नक्शे पर बदलती वैश्विक परिस्थितियों पर नजर डालें तो हम पाएंगे कि बीती सदी से अब तक दुनिया का शक्ति बिंदु क्लेम करते आए अमेरिका को चीन से कड़ी चुनौती मिल रही है, ऐसे में भारत अमेरिका का अहम सहयोगी और चीन के मुद्दे पर पावर एक्वालाइजर नजर आ रहा है.
इसी बात को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मुक्त, खुले और नियमों से जुड़े हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo Pacific Ocean) के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी महत्वपूर्ण है. सिंह ने कहा कि भारत क्षमता निर्माण तथा रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में अमेरिका के साथ मिलकर काम करने को उत्सुक है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, मेरे दोस्त रक्षा मंत्री ऑस्टिन से नई दिल्ली में मुलाकात करके खुश हूं. हमारी बातचीत सामरिक हितों के सुरक्षा सहयोग बढ़ाने समेत कई क्षेत्रों में रक्षा सहयोग मजबूत करने पर केंद्रित रही. मानेकशॉ सेंटर में वार्ता से पहले ऑस्टिन ने सलामी गारद का निरीक्षण किया.
तो अब भारत में ही बनेंगे लड़ाकू विमानों के इंजनइससे पहले, ऑस्टिन की यात्रा की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी रक्षा मंत्री ऑस्टिन लड़ाकू विमानों के इंजन के लिए भारत के साथ प्रौद्योगिकी साझा करने के जनरल इलेक्ट्रिक के प्रस्ताव और अमेरिकी रक्षा उपकरण कंपनी जनरल एटॉमिक एयरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक से तीन अरब अमेरिकी डॉलर के 30 एमक्यू-9बी सशस्त्र ड्रोन खरीदने की भारत की योजना पर चर्चा कर सकते हैं.
