सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा होने के आरोपों की जांच करे. याचिकाकर्ता ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लोगों के नाम काटने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन दिए जाने का आरोप लगाया था.

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 में जमा होने से जुड़ी शिकायतों पर जवाब मांगा था. छत्तीसगढ़ और केरल के मामलों का समाधान हो चुका है, लेकिन यूपी में अब भी समस्या बनी हुई है.

चुनाव आयोग ने क्या कहा?चुनाव आयोग की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने स्वीकार किया कि केरल और छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए गए थे. आयोग के अधिकारियों ने उनकी जांच की और उन्हें गलत पाया. इन आवेदनों के आधार पर किसी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं काटा गया. यूपी को लेकर अगर कोई शिकायत है तो उसे औपचारिक रूप से दर्ज कराया जाना चाहिए. अगर शिकायत मिली तो आयोग उनकी जांच करेगा.

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याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यूपी में एक विधानसभा क्षेत्र में एक खास समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर 32 फॉर्म-7 जमा किए गए थे. इनमें से दो फॉर्म पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के हस्ताक्षर भी थे. तेलंगाना और कर्नाटक में ऐसी शिकायतों पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई.

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह यूपी से जुड़ी जिन गड़बड़ियों की बात कह रहे हैं, उसकी जानकारी चुनाव आयोग को दें. जिन गड़बडियों का अब तक समाधान नहीं हुआ है, आयोग इनकी जांच कर जरूरी सुधार करे और कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करे.

केरल SIR की समय सीमा बढ़ाने से इनकारसुप्रीम कोर्ट ने केरल में SIR प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है. याचिकाकर्ता का कहना था कि कई लोगों को अब भी वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या सुधार की ज़रूरत है. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसे लोग चुनाव आयोग को आवेदन दे सकते हैं. आयोग उनके मामलों की जांच करेगा.