नोएडा एयरपोर्ट पर उड़ान का रास्ता साफ! CM योगी को सौंपा गया एयरोड्रम लाइसेंस, जल्द शुरू होगा सफर
पहले फेज में करीब 3,300 एकड़ में बना हिस्सा उद्घाटन के लिए तैयार है. पूरे प्रोजेक्ट के लिए अब तक 6,700 एकड़ जमीन अधिग्रहित हो चुकी है जबकि बाकी 5,100 एकड़ जमीन अगले तीन महीनों में ली जाएगी.

जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सबसे बड़े और आधुनिक हवाई अड्डों में से एक बनने की राह पर है. पहले फेज में एक रनवे से उड़ानें शुरू होंगी, जिसमें सालाना 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता होगी. रोजाना करीब 150 फ्लाइट्स ऑपरेट करने का अनुमान है.
अधिकारियों के मुताबिक जैसे ही सालाना यात्री संख्या 1 करोड़ का आंकड़ा पार करेगी ऑर्ब दूसरे रनवे का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा. दो रनवे होने के बाद एयरपोर्ट की क्षमता एकदम से बढ़कर 7 करोड़ यात्री सालाना हो जाएगी.
3,300 एकड़ में बना पहले फेज का हिस्सा
पहले फेज में करीब 3,300 एकड़ में बना हिस्सा उद्घाटन के लिए तैयार है. पूरे प्रोजेक्ट के लिए अब तक 6,700 एकड़ जमीन अधिग्रहित हो चुकी है जबकि बाकी 5,100 एकड़ जमीन अगले तीन महीनों में ली जाएगी. जमीन अधिग्रहण पर करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और निर्माण में करीब 7,000 करोड़ रुपये लगाए जा रहे हैं.
जेवर एयरपोर्ट पर होंगे पांच रनवे
पूरा प्रोजेक्ट तैयार होने पर जेवर एयरपोर्ट पर 5 रनवे होंगे और यह करीब 11,750 एकड़ में फैला होगा. इस एयरपोर्ट की अंतिम यात्री क्षमता 30 करोड़ सालाना तक पहुंचेगी जो इसे दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों की कतार में खड़ा कर सकती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट के चालू होते ही दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लगातार बढ़ता दबाव काफी हद तक कम होगा.
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को देगा नया विकल्प
यह दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़े ट्रांसपोर्ट हब के रूप में उभरेगा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों के लिए नया विकल्प देगा. लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, व्यापार और उद्योग को रफ्तार मिलेगी, बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके बनेंगे और उत्तर प्रदेश की पहचान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट मैप पर और मजबूत होगी.
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