नई दिल्ली: साल 2017 यूपी विधानसभा में मिली जीत का सिलसिला बरकरार रखते हुए बीजेपी ने यूपी निकाय चुनाव में भी प्रचंड जीत दर्ज की. इन नतीजों के बूते योगी आदित्नाथ अपने पहले इम्तिहान में आला दर्जे से पास हो गए. बीजेपी की आंधी में जहां समाजवादी पार्टी ताश के पन्नों की तरफ बिखर गई और खाता तक नहीं खोल सकी, वहीं मायावती ने अपने वापसी की संकेत दे दिया है. कुल 16 मेयर पदों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी 14 सीटों पर जीती को मेरठ और अलीगढ़ में बीएसपी ने जीत हासिल की है. बीएसपी की ये जीत इस बात को साबित करती है कि सूबे में उसका जनाधार अभी कायम है.
ये जीत इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि इसने ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी. क्या मायावती ने दलित मतदाताओं को एक बार फिर अपने पाले में कर लिया है जो बीजेपी के तरफ चले गए थे, ये सवाल भी उठने लगा है. बीएसपी ने यूपी के चार बड़े शहरों आगरा, अलीगढ़, मेरठ और झांसी में बड़ी मौजूदगी दर्ज कराई. आगरा और झांसी में बीएसपी ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी.
ऐसे में ये नतीजे बीजेपी के लिए चिंता की बात है. इस साल मार्च में हुए विधानसभा चुनाव और 2014 के चुनाव में इन इलाकों में बीजेपी की प्रचंड जीत हुई थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में तो बीएसपी 80 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य में खाता भी नहीं खोल सकी थी. जबकि इसी साल हुए यूपी विधानसभा चुनाव में मायावती की पार्टी को महज 19 सीटें मिली थीं.
राजनीति के जानकारों की मानें तो योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद पश्चिम यूपी में राजपूतों-दलितों में संघर्ष बढ़ा. इससे भीम सेना और रावण सेना के बैनर तले दलित एकजुट हुए हैं. राजनीति के जानकारों की बात में दम इसलिए है क्योंकि बीएसपी का वोट बैंक लगातार बढ़ रहा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी को करीब 20 फीसदी वोट मिले थे. लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर बीएसपी का वोट बैंक बढ़ा और ये 22 फीसदी तक पहुंच गया.
बीएसपी भले इस चुनाव में बड़ी जीत न दर्ज कर पाई हो लेकिन उसने साफ कर दिया है कि यूपी में ‘हाथी’ की ताकत को खारिज नहीं किया जा सकता है.
