उन्नाव रेप कांड: कुलदीप सेंगर की सजा स्थगित करने का मामला सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को वापस भेजा, नए सिरे से विचार का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने 'लोकसेवक' की जो परिभाषा दी, वह काफी तकनीकी थी. सीबीआई के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एमएलए प्रभावशाली स्थिति में होता है.

उन्नाव रेप मामले में कुलदीप सेंगर की सजा स्थगित करने पर दिल्ली हाई कोर्ट नए सिरे से विचार करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने मामला वापस हाई कोर्ट को भेज दिया है. पिछले साल दिसंबर में हाई कोर्ट ने सेंगर की सजा स्थगित की थी. सीबीआई की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी.
2017 के इस मामले में निचली अदालत ने सेंगर को आईपीसी की धारा 376(1) पॉक्सो एक्ट की धारा 5(C) के तहत उम्र कैद की सजा दी थी. यह धाराएं तब लगाई जाती हैं, जब 'लोकसेवक' पर रेप का आरोप हो. यह सजा देते समय निचली अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून में दी गई 'लोकसेवक' को आधार बनाया था. सेंगर की अपील को सुनते हुए पिछले साल दिसंबर में दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंगर को जमानत दी.
हाई कोर्ट ने सेंगर की सजा स्थगित करते हुए कहा था कि विधायक पॉक्सो एक्ट के तहत 'लोकसेवक' की श्रेणी में नहीं आता. इस आदेश के खिलाफ सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंची. 29 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी. शुक्रवार, 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने 'लोकसेवक' की जो परिभाषा दी, वह काफी तकनीकी थी. सीबीआई के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एमएलए प्रभावशाली स्थिति में होता है.
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट नए सिरे से मामले पर विचार करे. ऐसा करते समय वह सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित न हो. जजों ने हाई कोर्ट से कहा कि वह मुख्य मामले पर 2 महीने में सुनवाई पूरी करे. इस पर सेंगर के लिए पेश वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह हाई कोर्ट को पहले सजा स्थगन पर विचार करने को कहे. उनके अनुरोध को मानते हुए कोर्ट ने इसे अपने आदेश में दर्ज करवा दिया.
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सुनवाई के दौरान हरिहरन ने यह दलील भी दी कि पीड़िता नाबालिग नहीं थी. उन्होंने कहा कि AIIMS के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट भी यही कहती है. दूसरी सभी रिपोर्ट सेंगर के पक्ष में हैं. फिर भी वह जेल में है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हरिहरन से कहा कि वह अपनी बातें हाई कोर्ट में रखें.

























