मॉनसून सत्र खत्म होने के साथ ही विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा तो वहीं, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने गुरुवार को विपक्ष की रणनीति पर ही सवाल उठा दिए हैं. उन्होंने कहा कि पूरे सत्र के दौरान विपक्ष विशेष रूप से कांग्रेस, अपना रुख बदलती रही है. 

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उन्होंने कहा, यदि आप 19 तारीख को आयोजित सर्वदलीय बैठक को देखें तो उठाया गया प्राथमिक मुद्दा NEET परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं पर तत्काल चर्चा की मांग को लेकर था. हालांकि, जैसे ही चर्चा शुरू हुई, उन्होंने अपना रुख बदल दिया. उन्होंने यह तर्क देते हुए कहा कि मामला केवल चर्चा तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए. 

उन्होंने कहा, 'किसी को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. इसके अलावा उन्होंने ध्यान को दूसरी ओर मोड़ दिया. उनके बीच अंदरूनी कलह भी होने लगी. उदाहरण के लिए सपा राम मंदिर में चढ़ावे के संबंध में कथित अनियमितताओं पर चर्चा करना चाहती थी. जबकि कांग्रेस ने छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के मुद्दे को प्राथमिकता दी.'

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उन्होंने कहा, 'वे वास्तव में चर्चा नहीं चाहते थे. वे हंगामा चाहते थे. उन्होंने गृह मंत्री को इंतजार कराया. इसका तात्पर्य यह है कि वे स्वयं चर्चा नहीं चाहते थे.'

राहुल गांधी की भाषा न तो संयमित है, न ही गरिमापूर्ण: मेघवाल

इसके अलावा उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी की भाषा न तो संयमित है, न ही गरिमापूर्ण. लोकसभा में बोलते समय भी वे तरह-तरह की बातें करते हैं. इसीलिए कोई उन्हें गंभीरता से नहीं लेता. आरोप लगाना, झूठ बोलना और फिर भाग जाना उनके चरित्र का हिस्सा बन गया है. वे कभी चर्चा नहीं चाहते थे.  यह उनका काम करने का तरीका बन गया है. देखिए वे नरेंद्र मोदी के खिलाफ कितना बोलते हैं. वे यह सब ठीक-ठीक इसलिए कह पाते हैं क्योंकि बोलने की आजादी उन्हें ही मिली हुई है. युवा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं.  वास्तव में पिछले 12 वर्षों में युवाओं के लिए किए गए कार्यों की सूची लेकर बैठ जाना चाहिए. राहुल गांधी को वह सूची लेकर बैठ जाना चाहिए.  उनका दावा है कि कुछ भी नहीं किया गया है. 'झूठ बोलो और भाग जाओ'-यह उनका विशिष्ट गुण बन गया है.  इसीलिए इस बार सदन नहीं चल सका.'