'उदयपुर फाइल्स' की रिलीज पर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं लगाई रोक, केंद्र सरकार के आदेश का विरोध कर रहे पक्ष को हाई कोर्ट जाने को कहा
21 जुलाई को केंद्र सरकार की कमेटी ने फिल्म में छह कट लगाने के लिए कहा था, जिनमें डिस्क्लेमर को बदलकर वॉइस ओवर के साथ दिखाना भी शामिल है.

फिल्म उदयपुर फाइल्स के निर्माता की याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया है. निर्माता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार की कमेटी ने 6 बदलाव का आदेश दिया था. उसने इसका पालन कर नया सर्टिफिकेट हासिल किया है. फिल्म का विरोध कर रहे पक्ष ने कमेटी के आदेश का विरोध किया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट जाने की सलाह दी. ऐसे में फिलहाल इस फिल्म के प्रदर्शन पर कोई रोक नहीं है.
उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड पर आधारित इस फिल्म के खिलाफ सबसे पहले जमीयत उलेमा ए हिंद ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. हाई कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी थी. हाई कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार सिनेमेटोग्राफी एक्ट की धारा 6 के तहत मामले पर विचार कर फैसला ले. इसके खिलाफ निर्माता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.
निर्माता की याचिका सुनते हुए 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि वह पहले केंद्र सरकार की तरफ से गठित कमेटी के सामने अपनी बात रखें. कोर्ट ने जमीयत उलेमा ए हिंद और हत्या केस के आरोपी मोहम्मद जावेद को भी कमेटी के सामने जाने को कहा. कमेटी ने फिल्म को देखा और सभी पक्षों को विस्तार से सुना.
21 जुलाई को केंद्र सरकार की कमेटी ने फिल्म में 6 कट के लिए कहा. इसमें डिस्क्लेमर में बदलाव कर उसे वॉइस ओवर (आवाज) के साथ दिखाने, फिल्म के पात्र नूतन शर्मा (नूपुर शर्मा का बदला हुआ नाम) का नाम कुछ और रखने, नूतन शर्मा के एक डायलॉग (मैंने वही कहा जो उनके धर्म ग्रंथ में लिखा है) को हटाना शामिल है.
फिल्म निर्माता के लिए पेश वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने शुक्रवार, 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्य कांत और जोयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि उन्होंने कमेटी के आदेश का पालन किया है. अब फिल्म रिलीज के लिए तैयार है. जमीयत उलेमा हिंद और मोहम्मद जावेद के वकीलों ने केंद्र के आदेश को चुनौती देने की बात कही. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इसके लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं. हाई कोर्ट उनकी याचिका को सोमवार को सुने.
जमीयत के लिए पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने हाई कोर्ट की सुनवाई तक फिल्म की रिलीज रोकने का अनुरोध किया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा आदेश देने से मना कर दिया. ऐसे में फिलहाल फिल्म को रिलीज करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है.
जून 2022 में उदयपुर में दर्जी का काम करने वाले कन्हैयालाल की गला काट कर निर्मम हत्या हुई थी. उन दिनों पैगम्बर मोहम्मद के बारे में बीजेपी नेता नूपुर शर्मा के एक बयान को लेकर काफी विवाद चल रहा था. कन्हैयालाल ने नूपुर का समर्थन करने वाला पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर किया था. इसलिए मोहम्मद रियाज़ और मोहम्मद गौस ने उन्हें मार डाला. आरोप है कि कई और लोगों ने हत्या में सहयोग किया.
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले 55 कट का आदेश दिया था. इनमें उकसाने वाले दृश्य और संवाद हटाने, फिल्म को सत्य घटना पर आधारित काल्पनिक फिल्म बताने का डिस्क्लेमर लगाने और राजस्थान की जगह सिर्फ राज्य कहने जैसी कई बातें थीं. निर्माताओं ने उनका पालन किया. अब केंद्र सरकार की कमेटी की तरफ से बताए गए बदलाव भी कर दिए गए हैं.
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