नई दिल्लीः आतंकवाद और नक्सलियों की नकेल कसने वाला UAPA यानी Unlawful Activities (Prevention) Act बिल आज राज्यसभा में भी पास हो गया. अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद इस कानून में संशोधन लागू हो जाएंगे. बिल के पक्ष में 147 वोट पड़े और विरोध में 42 वोट पड़े. यूएपीए बिल पहले ही लोकसभा में पास हो चुका है. यूएपीए संशोधन बिल राज्यसभा से पास हो गया लेकिन इसे तीखी बहस और हंगामे का सामना करना पड़ा.

इससे पहले इस बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने के पक्ष में 85 और विरोध में 104 वोट पड़े जिसके बाद इसे सेलेक्ट कमिटी में भेजने का प्रस्ताव गिर गया. दरअसल सरकार ने यूएपीए बिल में कुछ संशोधन किए हैं.

UAPA यानी Unlawful Activities (Prevention) Act पहले से मौजूद है. सरकार ने इसमें कुछ संशोधन किए हैं...

  • पहले सरकार किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि संस्था को आतंकवादी घोषित करती थी. अब किसी व्यक्ति को भी आतंकी घोषित किया जा सकता है.
  • पहले इस कानून के तहत केस की जांच डीएसपी या एसीपी स्तर के अधिकारी ही करते थे.अब इंस्पेक्टर लेवल के अधिकारी भी जांच कर पाएंगे.
  • पहले किसी आतंकवादी की प्रॉपर्टी जब्त करने के लिए राज्य के डीजी की अनुमति लेनी होती थी. अब एनआईए का अधिकारी अपने यानी एनआईए के डीजी की अनुमति लेकर आतंकवादी की प्रॉपर्टी जब्त करने की कार्रवाई कर सकता है.

इससे पहले 25 जुलाई को लोकसभा में बुधवार को अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) में संशोधन वाले विधेयक को वोटिंग के बाद पास कर दिया गया था. तब लोकसभा में इस बिल के पक्ष में 287 जबकि विपक्ष में महज 8 वोट पड़े थे.

क्या है नए और पुराने कानून में अंतर

1- कौन हो सकता है आंतकी घोषित अभी केवल किसी समूह को आंतकी घोषित किया जाता है जबकि नए कानून के मुताबिक आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने की आशंका के आधार पर किसी अकेले व्यक्ति को भी आतंकी घोषित किया जा सकता है.

2- कैसे होगी संपत्ति जब्त दूसरा बदलाव आतंकी घोषित होने के बाद संपत्ति जब्त करने को लेकर है. मौजूदा कानून के मुताबिक एक जांच अधिकारी को आंतकी से संबंधित संपत्ति को जब्त करने के लिए राज्य पुलिस के महानिदेशक का परमिशन लेने की आवश्यक्ता होता है जबकि अब नए बिल में प्रावधान हैं कि आतंकवादी गतिविधि पर संपत्ति जब्त करने से पहले एनआईए को अपने महानिदेशक से मंजूरी लेनी होगी.

3-कौन कर सकता है जांच मौजूदा कानून के मुताबिक उप पुलिस अधीक्षक या सहायक पुलिस आयुक्त या इससे ऊपर रैंक के अधिकारी ही मामले की जांच कर सकते हैं. जबकि नए बिल में प्रावधान है कि आतंकवाद के मामले में एनआईए का इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी भी जांच कर सकेगा. इसके अलावा आतंकी घोषित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद कानून के बिंदुओ को भी जोड़ा जाएगा.