फ्लोर टेस्ट के बीच विजय के लिए खुशखबरी, TVK विधायक के मतदान पर लगी रोक SC ने हटाई
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर कहा कि उच्च न्यायालय ने माना कि चुनाव याचिका सुनवाई योग्य है और फिर उसने ऐसा आदेश पारित कर दिया.

तमिलनाडु में टीवीके के विधायक सीनिवास सेतुपति को सदन में मतदान से रोकने वाले आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. कोर्ट ने बुधवार (13 मई, 2026) को सुनवाई की और इस संबंध में नोटिस भी जारी कर दिया है. अब अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार सीनिवास सेतुपति को मद्रास हाईकोर्ट ने विधानसभा के 'फ्लोर टेस्ट' में हिस्सा लेने से रोक दिया था. उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली एक याचिका पर हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था. सेतुपति ने विधानसभा चुनाव में तिरुपत्तूर सीट पर डीएमके उम्मीदवार परियाकुरुप्पन को सिर्फ एक वोट से हरा दिया था, जिस पर पेरियाकुरुप्पन ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी. इस पर हाईकोर्ट ने सेतुपति को तमिलनाडु विधानसभा में किसी भी फ्लोर टेस्ट, ट्रस्ट वोट, कॉन्फिेंस मॉशन या नॉ-कॉन्फिडेंस मॉशन में हिस्सा लेने से रोक दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को निंदनीय बताया है.
सीनिवास सेतुपति की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और पेरियाकुरुप्पन की ओर से मुकुल रोहतगी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि मामला ये है कि मैं सिर्फ एक वोट के अंतर से चुनाव हारा हूं. कोर्ट ने सीनिवास सेतुपति से सवाल किया, 'आपने 226 के तहत याचिका कैसे दाखिल की? क्या चुनाव आयोग याचिकाकर्ता या प्रतिवादी का समर्थन कर रहा है?' इस पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'हां चुनाव आयोग ने हमारा समर्थन किया.'
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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर कहा कि उच्च न्यायालय ने माना कि चुनाव याचिका सुनवाई योग्य है और फिर उसने ऐसा आदेश पारित कर दिया.
पेरियाकुरुप्पन की ओर से मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, 'कृप्या मुझे कुछ तथ्य रखने की इजाजत दें. यह विधानसभा सीट 185 है और इसी नाम की एक और विधानसभा सीट है. पता चला है कि एक पोस्टल बैलट विधानसभा सीट 50 पर पहुंच गया. अगर यह सही पोस्टल एड्रेस पर पहुंचता तो इस सीट पर टाई हो जाता.'
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उन्होंने कहा कि सेक्शन 100 के तहत अधिकारी के समक्ष मतों की गिनती का प्रावधान है और चुनाव आयोग कह रहा है कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. कोर्ट ने आदेश में कहा कि हमने दोनों पक्षों को सुन लिया है. प्रतिवादी के वकील को दो हफ्तों का समय दिया जाता है. कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट के आदेश पर रोक जारी रहेगी. साथ ही इस मामले में कोर्ट में आगे की कार्यवाही भी स्थगित रहेगी.
(निपुण सहगल के इनपुट के साथ)
























