शपथ ग्रहण में तमिल ताई वंदन गीत को आखिर में बजने पर विवाद, TVK की नाराजगी, जानें क्या कहा
Vijay CM Oath Ceremony: TVK चीफ विजय के सीएम पद के शपथ ग्रहण समारोह के शुरु होने से पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम, फिर राष्ट्रगान जन गन मन और आखिर में राज्य का आधिकारिक गीत बजाया गया था.

- तमिल थाई वंदन गीत को राज्य गीत का दर्जा मिला है।
- नई सरकार ने शपथ ग्रहण समारोह में परंपरा बदली।
- राज्यपाल ने केंद्र के नए परिपत्र का हवाला दिया।
- भविष्य में पुरानी परंपरा का ही पालन होगा।
‘नीरारुम कडलुडुथ…’ से शुरू होने वाले तमिल थाई वंदन गीत को 100 साल से अधिक पुरानी ऐतिहासिक विरासत का गौरव प्राप्त है. ‘यह गीत पूरी दुनिया में गूंजना चाहिए…’ इसी आदर्श को आगे बढ़ाते हुए तमिलनाडु सरकार ने इसे राज्य गीत घोषित किया था. इतनी प्रतिष्ठा वाले तमिल थाई वंदन गीत को तमिलनाडु में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों सहित सभी आयोजनों की शुरुआत में बजाया जाता है और कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय गान बजाया जाता है. यही सामान्य और उचित परंपरा रही है.
तमिलनाडु में TVK के नेतृत्व में बनी नई सरकार को भी इस परंपरा को लेकर कोई वैकल्पिक मत नहीं है. ऐसे में आज कार्यवाहक राज्यपाल आरवी अर्लेकर की अध्यक्षता में हुए मुख्यमंत्री और मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में पहले वंदे मातरम्, फिर राष्ट्रगान और उसके बाद तीसरे क्रम में तमिल थाई वंदन गीत बजाया गया. यह नई व्यवस्था तमिलनाडु की परंपरा के अनुरूप नहीं है. तमिल भूमि में तमिल थाई वंदन गीत का तीसरे स्थान पर बजाया जाना, TVK के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार को स्वीकार नहीं है.
केंद्र के नए परिपत्र के मुताबिक कार्य करना राज्यपाल की जिम्मेदारी
जब इस संबंध में राज्यपाल पक्ष से जोर देकर बात की, तो बताया गया कि केंद्र सरकार के नए परिपत्र के अनुसार, कार्य करना राज्यपाल की जिम्मेदारी है. इसी कारण, अपरिहार्य परिस्थिति में तमिल थाई वंदन गीत तीसरे क्रम में बजाया गया, लेकिन भविष्य में यह नई व्यवस्था लागू नहीं की जाएगी. पहले की परंपरा के अनुसार ही कार्यक्रम की शुरुआत तमिल थाई वंदन गीत से होगी और अंत राष्ट्रगान से किया जाएगा.
सिर्फ तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि भारत के सभी राज्यों में संबंधित राज्य की भाषा के वंदन गीत से ही कार्यक्रमों की शुरुआत होनी चाहिए. इसके लिए केंद्र सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए. तमिलनाडु की जनता की सामूहिक भावना और एकमत विचार यही है. यही हमारा दृढ़ रुख भी है.
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