‘वर्क फ्रॉम होम’ और ऑनलाइन मीटिंग की सलाह से ऑफिस स्पेस मार्केट में हलचल? बिल्डर बोले- अभी घबराने जैसी स्थिति नहीं
प्रधानमंत्री की अपील के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या कोविड काल की तरह फिर से ऑफिस स्पेस की मांग प्रभावित हो सकती है? रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञ फिलहाल इसे लेकर ज्यादा चिंतित नहीं दिख रहे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण को लेकर दिए गए सुझावों के बाद रियल एस्टेट और कमर्शियल ऑफिस सेक्टर में भी चर्चा तेज हो गई है. पीएम मोदी ने लोगों से अगले एक साल तक अनावश्यक सोने की खरीदारी टालने, पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम अपनाने, ऑनलाइन मीटिंग्स बढ़ाने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के ज्यादा इस्तेमाल की अपील की है. इसके अलावा उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालने की भी सलाह दी.
प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या कोविड काल की तरह फिर से ऑफिस स्पेस की मांग प्रभावित हो सकती है? हालांकि रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञ फिलहाल इसे लेकर ज्यादा चिंतित नहीं दिख रहे.
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एक्सपर्ट्स ने क्या बताया है?
प्रदीप मिश्रा, फाउंडर होमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, का कहना है कि यह स्थिति फिलहाल शॉर्ट टर्म और प्रिकॉशनरी कदम जैसी दिखती है. उन्होंने कहा, 'मोदी जी ने जो अपील की है, उसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा की बचत और संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल है. इसका सीधा संबंध कमर्शियल ऑफिस स्पेस की मांग घटने से नहीं है, क्योंकि यह कोविड जैसी स्थिति नहीं है.'
प्रदीप मिश्रा के अनुसार सरकार अब तक ग्लोबल परिस्थितियों, खासकर मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बढ़ते क्रूड ऑयल दबाव को काफी हद तक मैनेज करती रही है. उन्होंने कहा, 'सरकार ने फ्यूल और क्रूड ऑयल की कीमतों के असर को काफी हद तक खुद झेल लिया है. इसलिए फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं दिख रही कि ऑफिस स्पेस की डिमांड अचानक गिर जाए.'
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में डेवलपर्स का ज्यादा फोकस रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर रहा है, जबकि कमर्शियल सेक्टर में नई सप्लाई सीमित रही. उन्होंने कहा, 'कमर्शियल स्पेस पहले से ही सीमित मात्रा में विकसित हुआ है, इसलिए डिमांड और सप्लाई पर बहुत बड़ा असर पड़ता अभी नजर नहीं आ रहा,'
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की अपील को फिलहाल एक एहतियाती कदम के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि कोविड जैसी व्यापक आर्थिक बंदिशों की वापसी के तौर पर. हालांकि यदि लंबे समय तक कंपनियां हाइब्रिड या वर्क फ्रॉम होम मॉडल पर जोर देती हैं, तो भविष्य में ऑफिस स्पेस सेक्टर की रणनीतियों में बदलाव जरूर देखने को मिल सकता है.
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