नई दिल्ली: त्वरित तीन तलाक़, यानि तलाक़ ए बिद्दत की प्रथा खत्म करने के लिए लोकसभा में कल बिल पेश किया जाएगा. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद सरकार की तरफ से दोपहर बाद बिल पेश करेंगे. बिल में त्वरित तीन तलाक़ को अपराध करार देते हुए इसके दोषियों को 3 साल तक क़ैद का प्रावधान किया गया है. लेकिन बिल पेश होने के पहले ही सज़ा वाले प्रावधान को लेकर विरोध शुरू हो गया है.
कांग्रेस को है आपत्ति
कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने इस प्रावधान से होने वाले नुकसान और सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा किया है. कांग्रेस का कहना है कि पार्टी इस बिल के खिलाफ नहीं है लेकिन बिल में शामिल सज़ा का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के खिलाफ है. पार्टी के लोक सभा सांसद और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी के मुताबिक़ "तीन तलाक़ का आरोपी व्यक्ति अगर जेल में रहेगा तो फिर तलाक़ दी गयी महिला का भरण पोषण और गुज़ारा कौन करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा नहीं कहा है." चौधरी मोदी सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहते हैं-"सरकार पर्दे के आगे तो सामाजिक मुद्दा रखती है लेकिन पीछे राजनीतिक मंशा होती है."
बिल कोर्ट के आदेश के मुताबिक : सरकार
उधर सरकार ने एक बार फिर अपनी मंशा साफ कर दी है. कानून और न्याय राज्यमंत्री पी पी चौधरी ने एबीपी न्यूज़ से कहा, "बिल सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के अनुरूप ही है .... सरकार इस बिल को लेकर प्रतिबद्ध है." चौधरी ने विपक्ष और आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उस आरोप को भी खारिज कर दिया कि बिल पर चर्चा नहीं कि गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने ग़ैर कानूनी घोषित किया
दरअसल इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल तीन तलाक़ को ग़ैर क़ानूनी और असंवैधानिक क़रार देते हुए सरकार से इस मामले में क़ानून बनाने को कहा था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी देश भर में कुल 67 ऐसे मामले सामने आए हैं. इनमें सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश से आए हैं .
क्या है बिल में ?
बिल का नाम Muslim Women ( Protection of Rights on Marriage ) Bill , 2017 रखा गया है
बिल में तत्काल 3 तलाक़ यानि तलाक़ ए बिद्दत को गैर कानूनी और असंवैधानिक घोषित किया गया है और इस अपराध को ग़ैर ज़मानती और संज्ञेय बनाया गया है. ऐसा करने वालों के लिए 3 साल की सज़ा और भारी ज़ुर्माने का प्रावधान है. तत्काल 3 तलाक़ को हर तरीक़े से ग़ैर क़ानूनी क़रार किया गया है. जैसे बोलकर या लिखकर, या फिर तकनीक़, जैसे वाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से दिया गया 3 तलाक़ भी बिल में पीड़ित महिला के भरण पोषण, गुजारा भत्ता और नाबालिग़ बच्चों को रखने का अधिकार भी दिया जाएगा. ज़ुर्माने की रक़म और महिलाओं के गुज़ारा भत्ता के साथ साथ बच्चों के बारे में भी फ़ैसला मजिस्ट्रेट करेगा.
सियासी तौर पर अहम है बिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी और गुजरात चुनावों के दौरान कई बार तीन तलाक़ के मामले को उठाते हुए कांग्रेस पर हमला किया था. ज़ाहिर है 2019 के आम चुनाव के मद्देनजर मोदी सरकार के लिए ये बिल काफी अहम है.
