प्रतिष्ठित आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा को आज उनकी पुण्यतिथि पर याद किया जा रहा है. मुंडा जनजाति के एक निडर शख्सियत, बिरसा मुंडा ने बंगाल, बिहार और झारखंड की सीमा से लगे क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था. उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और राजनीतिक दलों के नेता बिरसा मुंडा को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं.
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने लिखा, "आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी 'धरती आबा' बिरसा मुंडा को आज उनकी पुण्यतिथि पर याद कर रहा हूं. निडर आदिवासी नेता ने दमनकारी ब्रिटिश शासन के खिलाफ आदिवासी आंदोलन का नेतृत्व कर स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान दिया. बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि." झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अंधविश्वास को मिटाने और बीमारियों के प्रसार को रोकने में बिरसा मुमदा के प्रयासों की सराहना की.
झारखंड के सीएम ने भी दी श्रद्धांजलि
हेमंत सोरेन ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, बिरसा मुंडा के काम से प्रेरणा लेते हुए हमें कोरोना महामारी से लड़ना है." उन्होंने ट्वीट किया, "आदिवासी अधिकारों के लिए शोषकों के खिलाफ उलगुलान छेड़ने वाले धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा जी के शहादत दिवस पर शत-शत नमन. धरती आबा ने समाज में बीमारियों को लेकर फैले अंधविश्वास भी मिटाने का काम किया था. आज धरती आबा से प्रेरणा लेकर हमें कोरोना को दूर भगाना है."
बिरसा मुंडा ने आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ी लड़ाई
छोटानागपुर पठार के आदिवासी क्षेत्र में जन्मे बिरसा मुंडा ने किशोरावस्था में ही आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ना शुरू कर दिया था. बिरसा मुंडा ने एक जर्मन मिशन स्कूल में पढ़ाई की लेकिन कुछ ही सालों में उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी. ब्रिटिश शासकों के अत्याचार को देखते हुए, बिरसा मुंडा ने 'बिरसैत' नामक अपना संप्रदाय शुरू किया था. मुंडा और उरांव जनजाति के कई लोग उनके संप्रदाय और उनके आंदोलन में शामिल हो गए थे.
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