लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला टीएमसी के बागी सांसदों से जुड़े मामले में कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लेंगे. इस मामले में वह दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद ही अपना फैसला करेंगे. जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों के गुट को लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय की ओर से ईमेल भेजा गया है. इस ईमेल के जरिए सांसदों को मुलाकात के लिए बुलाया गया है. दोनों पक्षों की दलीलें और उनका पक्ष सुनने के बाद ही स्पीकर इस मामले में आगे का फैसला करेंगे.

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गौरतलब है कि टीएमसी के बागी गुट के 20 सांसदों ने हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने एक पत्र सौंपकर अपने गुट के एनसीपीआई (NCPI) में विलय का आग्रह किया था. अब इस पूरे मामले में लोकसभा अध्यक्ष पहले संबंधित पक्षों को सुनेंगे और सभी तथ्यों पर विचार करेंगे. इसके बाद ही बागी गुट के विलय और उससे जुड़े अन्य मुद्दों पर कोई आधिकारिक निर्णय लिया जाएगा.

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तृणमूल कांग्रेस में बगावत से किसको फायदा?

तृणमूल कांग्रेस में बगावत से संसद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ताकत बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि वह अहम संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, राज्यसभा चुनावों का मौजूदा दौर राजग को दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने में मदद करेगा, लेकिन लोकसभा में टीएमसी सांसदों के पाला बदलने के बावजूद, वह अब भी 363 के इस जादुई आंकड़े से काफी दूर है. सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा में राजग के मौजूदा 148 सांसदों की संख्या में तीन और सीटें जुड़ने की उम्मीद है.  यह बढ़ोतरी झारखंड और मिजोरम में हो रहे राज्यसभा चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों की सीटें जीतने से हो सकती है. टीएमसी के तीन राज्यसभा सदस्यों के इस्तीफे के बाद, उपचुनावों में राजग पश्चिम बंगाल की तीनों सीटें जीत सकती है.

टीएमसी के सांसदों के इस्तीफा देने की बात

इससे उसकी कुल संख्या 154 हो जाएगी, जो उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत से नौ कम है. चूंकि उच्च सदन में टीएमसी के और सांसदों के इस्तीफा देने की अटकलें जताई जा रही हैं, ऐसे में राजग 163 का आंकड़ा छू सकता है, जिससे उसे सभी संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित करने के लिए जरूरी संख्या बल मिल जाएगा. नवंबर तक सत्ताधारी गठबंधन की ताकत कम हो सकती है, क्योंकि उत्तर प्रदेश से 10 सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. राज्य विधानसभा में अपनी बेहतर संख्या-बल के कारण समाजवादी पार्टी को राज्यसभा में कुछ सीटें मिल सकती हैं. विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के साथ अभी 64 सांसद हैं; द्रमुक के आठ सांसदों के अलग होने और आप के तीन सांसदों के गठबंधन से दूरी बना लेने के बाद यह स्थिति बनी है. वाईएसआर कांग्रेस और बीजद जैसे दल जिनके पास क्रमशः सात और छह सीटें हैं, राज्यसभा में किसी भी तरफ जा सकते हैं. ये दल किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं. 

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