पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी  ने मंगलवार (4 अगस्त) को फेसबुक लाइव के दौरान टीएमसी सांसद और विधायकों को धमकियों के आरोप से लेकर पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला.

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टीएमसी प्रमुख ने आरोप लगाया कि उनके सांसदों और विधायकों को धमकियां दी जा रही हैं, पुलिस या तो उनको बीजेपी में शामिल होने के लिए कह रही है या फिर जेल जाने के लिए कह रही है. उन्होंने दावा किया कि हजारों टीएमसी कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया है. भाजपा ने बंगाल को एक विशाल जेल में बदल दिया है.

बीजेपी पर साधा निशाना

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टीएमसी प्रमुख ने कहा, भाजपा सरकार बनाने के साथ-साथ विपक्ष भी खड़ा करना चाहती है, इस प्रवृत्ति के खिलाफ जल्द ही बड़े पैमाने पर आलोचना की जाएगी. उन्होंने आगे कहा, परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं को राष्ट्र-विरोधी करार दिया गया और प्रताड़ित किया गया, उनके परिवारों को भी धमकियां दी गईं.

जनगणना प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल

जनगणना की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में राजनीतिक दलों को शामिल किए बिना कराई जा रही जनगणना से इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह है.

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सुभाष चंद्र बोस के अपमान का लगाया आरोप

बनर्जी ने बीजेपी पर सुभाष चंद्र बोस और उनकी विरासत का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा, 'भाजपा नेताओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जिस तरह से अपमान किया जा रहा है, उससे मैं बेहद निराश और हैरान हूं, यह बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे देश का अपमान है. उन्होंने यह भी कहा, 'मैं लोगों से एकजुट होने और नेताजी के साथ किए जा रहे इस अपमान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अपील करती हूं.'

बनर्जी की टिप्पणियां भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की ओर से हाल ही में की गई आलोचनाओं पर आधारित थीं, जिन्होंने नेताजी के संघ परिवार के विचारक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ राजनीतिक मतभेदों के परिप्रेक्ष्य में बोस के गठित पार्टी ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ पर निशाना साधते हुए उसके सदस्यों को 'गुंडों' की संज्ञा दी थी. इस टिप्पणी की विपक्षी दलों और बोस के परिवार के कुछ सदस्यों ने कड़ी आलोचना की और इसे अपमानजनक बताया. भाजपा ने इस बात से इनकार किया है कि इन घटनाओं से नेताजी के प्रति कोई अनादर झलकता है और इन्हें बोस की विरासत पर हमले के बजाय राजनीतिक असहमति के रूप में पेश किया है.

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