भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार (3 जून, 2026) को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर डॉ. भीमराव आंबेडकर का अपमान करने का आरोप लगाया. पार्टी का आरोप है कि एक वीडियो में वह जूते-चप्पल पहने हुए आंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित करती दिखाई दे रही हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक छोटा वीडियो साझा करते हुए कहा कि आंबेडकर का अपमान करना ही तृणमूल कांग्रेस की पहचान बन गया है.

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उन्होंने कहा, 'आंबेडकर जी का अपमान करना ही तृणमूल कांग्रेस की एकमात्र पहचान है. तृणमूल कांग्रेस ने आंबेडकर जी का अपमान किया है. जिस तरह ममता बनर्जी ने आंबेडकर जी को पुष्पांजलि अर्पित करते समय अपनी चप्पल तक उतारने की जरूरत नहीं समझी, वह तृणमूल, ममता बनर्जी और उनके परिवार की मानसिकता को दर्शाता है.' उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल ने बार-बार डॉ. आंबेडकर के आदर्शों और सिद्धांतों के विपरीत काम किया है.

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शहजाद पूनावाला ने दावा किया, 'वे हमेशा आंबेडकर जी का अपमान करते हैं. उन्होंने आंबेडकर जी की सोच के विपरीत मुस्लिम आरक्षण की मांग की है. वे संवैधानिक नियमों के खिलाफ गए हैं. उन्होंने न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपमानित किया है.' इस विवाद को तृणमूल के खिलाफ भाजपा की व्यापक आलोचना से जोड़ते हुए शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के लिए संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी करती है.

उन्होंने कहा, 'इन्होंने ही वोट बैंक की राजनीति के लिए ओबीसी और अनुसूचित जाति (SC) का आरक्षण छीनकर मुस्लिम समुदाय को दिया है. इन्होंने संविधान से ऊपर शरिया को महत्व दिया है. जब वक्फ संबंधी केंद्रीय कानून आया तो इन्होंने उसका विरोध किया. इससे स्पष्ट है कि ये आंबेडकर विरोधी हैं.'

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शहजाद पूनावाला ने अन्य विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनमें भी आंबेडकर के आदर्शों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का अभाव है. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस स्वयं आंबेडकर विरोधी है. ये सभी दल वास्तव में वोट बैंक की राजनीति को हर चीज से ऊपर रखते हैं.' भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल ने संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों से आने वाले नेताओं का भी अनादर किया है.

उन्होंने कहा, 'इन्होंने आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान किया. ये एक ओबीसी प्रधानमंत्री का भी अपमान करते हैं. इन्हें एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों की कोई परवाह नहीं है. ये बार-बार आंबेडकर जी का अपमान करते रहते हैं.'

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