जयपुर: एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति की गरिमा पर खरा उतरने का विश्वास दिलाया है. कोविंद ने बताया कि वे राष्ट्रपति चुने जाने पर भारत के संविधान के अनुसार कार्य करते हुए इस पद के मापदण्डों पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे.
कोंविद ने बीजेपी सांसदों और विधायकों की बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा, ‘‘बिहार में मैंने राज्यपाल के तौर पर उस पद की गरिमा को कभी आंच नहीं आने दी. राष्ट्रपति का पद सबसे अधिक गरिमामय होता है. इस पद को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. एस राधाकृष्णन, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तियों ने सुशोभित किया है.
कोविंद ने अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा कि देश और सभी प्रदेशों का सर्वांगीण विकास, सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के साथ न्यायपूर्ण और समान व्यवहार, आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देना और देश के युवाओं की आकांक्षाओं और आशाओं की पूर्ति करने पर उनका विशेष ध्यान रहेगा.
केन्द्रीय शहरी विकास और गरीबी उन्मूलन मंत्री वेंकैया नायडू ने विपक्षी पार्टियों के उम्मीदवार के ‘सैद्धान्तिक लड़ाई’ के दावे को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए होने वाला चुनाव सैद्धान्तिक लड़ाई नहीं है, क्योंकि सैद्धान्तिक लड़ाई तो साल 2014 में हो चुकी है और देश की जनता ने अपना मत दे दिया था. उन्होंने कहा कि हमारे देश में राष्ट्रपति का कार्य संविधान के अनुसार आमजन के अधिकारों का संरक्षण करना है.
नायडू ने कहा कि कोविंद के व्यक्तित्व, कृतित्व और नेतृत्व को ध्यान में रखकर ही उनको राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सभी विपक्षी दलों को भी साथ लेकर राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय करने की कोशिशें की थीं लेकिन विपक्षी राजनैतिक दलों ने तब कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और आम सहमति से अलग होकर अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी.
