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तुर्किए में मीटिंग, दिल्ली दहलाने की साजिश, लाल किला बम ब्लास्ट में शामिल डॉक्टरों ने इस App के जरिए रचा खतरनाक प्लान

एबीपी न्यूज़ डेस्क   |  अविनाश झा  |  13 Nov 2025 12:17 PM (IST)

फरीदाबाद-सहारनपुर मॉड्यूल की जांच में खुलासा हुआ है कि जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी 'सेशन' ऐप का इस्तेमाल करते थे, जिसमें मोबाइल नंबर की जरूरत नहीं होती और डेटा भी सुरक्षित रहता है.

तुर्किए में मीटिंग, दिल्ली दहलाने की साजिश, लाल किला बम ब्लास्ट में शामिल डॉक्टरों ने इस App के जरिए रचा खतरनाक प्लान

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद-सहारनपुर मॉड्यूल की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है, एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि जैश के फिदायीन मॉड्यूल के आरोपी डॉक्टर मुज़म्मिल और डॉक्टर उमर सेशन नाम के एक एनक्रिप्टेड मैसेंजर ऐप का प्रयोग हैंडलरों से बात करने के लिए करते थे. इस ऐप में किसी भी यूजर को अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर की जरूरत नहीं होती है और चैट का मेटाडेटा भी सेव नहीं होता है. सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टर मुजम्मिल ने जानकारी दी है कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ने के शुरुआती दिनों में उसकी बात जिस हैंडलर से होती थी उसका छद्म नाम 'अबू उकासा' था और वो तुर्की का वर्चुअल नंबर प्रयोग करता था. शुरुआती दिनों में इस हैंडलर ने जो अपना नंबर व्हाट्सएप पर बात करने के लिए दिया था वो +90 का था, लेकिन फिर इस हैंडलर ने दोनों से सेशन ऐप पर बातचीत करने के लिए कहा ताकि उनकी बातचीत कभी लीक ना हो और एजेंसियों को पता ना लगे.

हैंडलर से मिलने की तुर्की ही क्यों चुना गया?

देश की सुरक्षा एजेंसियों को शक ना हो इसलिए डॉक्टर मुज़म्मिल ने पूछताछ में कबूला है कि साल 2022 हैंडलर से मिलने की लोकेशन भी तुर्की चुनी गई थी. जब वो और डॉक्टर उमर तुर्की गए थे, तब जैश के जिन हैंडलरों से मिले थे उनमें अबू उकासा छद्म नाम का ये हैंडलर भी था. सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों को भनक ना लगे इसलिए मिलने के लिए तुर्की की लोकेशन चुनी गई थी. जैश का हैंडलर भी तुर्की का ही वर्चुअल नंबर प्रयोग करता था ऐसे में इन दोनों डॉक्टरों के पकड़े जाने पर पाकिस्तान या जैश का कोई लिंक सामने ना आए इसलिए ये पूरा तुर्की वाला प्लान किया गया था.

दो टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ा था ये मॉड्यूल 

जांच में ये भी सामने आया है कि डॉक्टरों वाला ये हाइब्रिड आतंकियों का मॉड्यूल दो टेलीग्राम ग्रुप 'उमर बिन ख़िताब' और 'फ़र्ज़ान दारुल उलूम' में जुड़ा हुआ था जिस पर खुफिया एजेंसियों को शक है कि ये ग्रुप जैश ए मोहम्मद के थे क्योंकि इन ग्रुपों में जैश ए मोहम्मद और मौलाना मसूद अजहर के पुराने बयान, चिट्ठियां, जिहाद के लिए उकासावे वाली आतंक समर्थक पोस्ट किए जाते थे.

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Published at: 13 Nov 2025 10:18 AM (IST)
Tags:SaharanpurJaish-e-MohammedfaridabadJaish e MohammedTurkiyeDr Umar Un Nabi
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