नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन है. लोग अपने घर से नहीं निकल सकते. स्कूल, कॉलेज, दफ्तर बंद हैं. वहीं, अस्पतालों में एहतियात के तौर पर ओपीडी सर्विस भी बंद है ताकि कोई भी अस्पताल में पहुंचने से संक्रमित ना हो जाए. ऐसे में उन लोगों को काफी दिक्कत होगी, जिन्हें डॉक्टर को दिखाना था. जिनके रूटीन चेक अप होने है या तबीयत खराब है और डॉक्टर को दिखाना है, उन्हें जरूर दिक्कत हो रही है. लेकिन इस दिक्कत का भी समाधान हो गया है. टेली कंसल्टेशन यानी मरीज अपने घर रहते हुए वीडियो कॉल या फोन पर डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं.
इसी को ध्यान में रखते हुए कई अस्पतालों ने डॉक्टर टेली कंसल्टेंसी की शुरुआत की है. यानी मरीज बिना अस्पताल या क्लीनिक पर आए डॉक्टर को दिखा सकेंगे. वह भी अपने घर बैठे बैठे. यानी मरीज और डॉक्टर को अपने घर पर ही रहते हुए ही डॉक्टर से कंसल्ट कर सकेंगे. ऐसे वक़्त में जब लॉकडाउन है और अस्पताल में संक्रमण का खतरा है तो ये अच्छा तरीका है डॉक्टर को दिखाने का.
टेली कंसल्टेंसी की शुरुआत कई अस्पतालों ने की है. इसको लेकर भारत सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने गाइडलाइंस भी तैयार की हैं. मैक्स हॉस्पिटल में भी टेली कंसल्टेंसी चल रही है. कोई मरीज डॉक्टर को दिखाना चाहता है तो वो टेली कंसल्टेंसी से ऐसा कर सकते हैं. मैक्स हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन की डॉक्टर हैं, वो पिछले कुछ दिनों से लगातार टेली कंसल्टेंसी कर रही हैं. उनके मुताबिक, "ऐसे हालात में जब घर से निकल नहीं सकते और अस्पताल में कहीं ना कहीं संक्रमित होने का खतरा है तो घर पर से टेक्स्ट, ऑडियो या ऑडियो वीडियो कॉल के जरिए मरीज डॉक्टर से मिल सकता है. वहीं, इस से मरीज को निकलने में परेशानी भी नहीं होगी और कोई इंफेक्शन का खतरा भी नहीं."
ये टेली कंसल्टेशन फोन या ऑडियो वीडियो कॉल के जरिए हो सकती है. इसे वॉट्सएप, स्काइप, फेसटाइम, गूगल हैंगआउट जैसे ऐप की मदद से किया जा सकता है. वहीं, कई अस्पतालों ने अपनी वेबसाइट पर इसके लिए खास इंतजाम किए हैं. इसमें अगर किसी व्यक्ति या मरीज को डॉक्टर से कंसल्ट करना है और वो किसी अस्पताल में है, तो उसकी वेबसाइट पर जाकर पहले अपॉइंटमेंट लें, ऑनलाइन पैसे जमा कराएं और अपनी पूरी हिस्ट्री और पुराने प्रिस्क्रिप्शन जमा कराएं. इसके बाद मरीज को अपॉइंटमेंट मिलता है, फिर डॉक्टर को वीडियो कॉल कर अपनी तकलीफ बता सकते हैं.
दिल्ली से सटे नोएडा में मौजूद मेट्रो हॉस्पिटल में भी ये सुविधा शुरू हो चुकी है. मेट्रो हॉस्पिटल के डॉ प्रशांत के मुताबिक, "इस टेली कंसल्टेंसी के लिए अब कई पेशंट आने लगे हैं, जोकि इस माहौल में अच्छा है. इस में दो तरह के पेशंट आते हैं. एक जिनका रूटीन चेक अप है या फॉलो अप या फिर फर्स्ट टाइमर. इन दोनों केस में हम उनसे उनके सारी हिस्ट्री, लक्षण और जानकारी लेते हैं और उनका पूरा प्रोफ़ाइल तैयार करते हैं. इसके बाद कॉन्फ्रेंस के दौरान उनकी बातों से उनका ट्रीटमेंट करते हैं.
पहले हमारे देश में ये टेली कंसल्टेंसी की सुविधा नहीं थी, लेकिन बाकी देश जैसे अमेरिका और यूरोप के कई देशों में सुविधा थी. लेकिन कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते भारत में केंद्र सरकार और एमसीआई ने इसके कुछ नियम और गाइडलाइन बनाई.
टेली कंसल्टेशन के कुछ नियम भी हैं...
- टेली कंसल्टेशन रजिस्टर्ड डॉक्टर ही कर सकते हैं.
- टेली कंसल्टेशन में सिर्फ डायग्नोसिस, ट्रीटमेंट, हैल्थ एजुकेशन और काउंसलिंग होगी.
- वहीं इसके लिए पेशंट का कंसेंट यानी सहमती होनी चाहिए.
- डॉक्टर को अपने सभी प्रिस्क्रिप्शन प्रिंटेड लेटर पैड पर लिखनी होंगी, साथ ही नीचे स्टैम्प, जिसमें उनका रजिस्ट्रेशन नंबर होगा और सिग्नेचर या डिजिटल सिग्नेचर.
- डॉक्टरों को इस टेली कंसल्टेशन का रिकॉर्ड रखना जरूरी है.
- डॉक्टर को प्रिस्क्रिप्शन पर मरीज का नाम, उम्र, और समय के साथ वीडियो या टेली कंसल्टेशन लिखना होगा.
- वहीं, प्रिस्क्रिप्शन पर मरीज के लक्षण, उसके द्वारा दी गई जानकारी और डॉक्टर ने अगर कोई टेस्ट की सलाह दी है तो उसे भी साफ साफ लिखना जरूरी है.
- प्रिस्क्रिप्शन डॉक्टर के हाथ से लिखी हो या फिर टाइप की होनी चाहिए.
- अगर पुराना मरीज है तो डॉक्टर को लास्ट विजिट का जिक्र करना होगा.
- टेली कंसल्टेशन में डॉक्टर हर दवा नहीं दे सकते हैं. इसके लिए एक लिस्ट ओ, ए और एक्स.
- लिस्ट ए सिर्फ फॉलो अप, जैसे पहले से दी जा रही एंटी बायोटिक और स्पेसिफिक दवा है .
- अगर लगता है कि मरीज को कुछ टेस्ट कराने हैं और खुद जांच के लिए आना चाहिए तो प्रिस्क्रिप्शन पर लिखना होगा.
ये टेली कंसल्टेशन उन मरीजों के लिए ठीक है जो रूटीन, फॉलो अप, कंसल्टिंग चेक अप या ऐसी बीमारी जिसके लिए डॉक्टर के पास जाना जरूरी न हो और बता कर भी दवा ले सकते हैं. वहीं इस समय लॉकडाउन और संक्रमण के खतरे से भी बच सकते हैं. अगर किसी को किसी भी टेस्ट के लिए या अपनी तकलीफ दिखाने डॉक्टर के पास या अस्पताल जाना है तो वो जा सकता है. इमरजेंसी और अस्पताल खुले हुए हैं.